Vaping विवाद से Playoff हीरो तक, Captain Riyan Parag ने ऐसे पलटी Rajasthan Royals की किस्मत

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 26, 2026

क्रिकेट विशेषज्ञों से लेकर सोशल मीडिया तक आलोचकों के निशाने पर रहे राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने अपनी टीम को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के प्लेऑफ में पहुंचाकर खुद को एक कुशल नेतृत्वकर्ता साबित कर दिया। असम का यह 24 वर्षीय खिलाड़ी जब 2019 में पहली बार राजस्थान रॉयल्स से जुड़ा था तभी से उन्हें हर कदम पर आलोचना का सामना करना पड़ा है। उनका बेहद आत्मविश्वासी होना और बिना लाग लपेट के अपनी बात कहना कई लोगों को नागवार गुजरा उन्हें ‘अहंकारी’ तक कहा गया।

आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के चलते उसी साल उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली, लेकिन कुछ समय बाद ही कंधे की पुरानी चोट के लिए उनकी सर्जरी हुई, जिस कारण उन्हें राष्ट्रीय टीम से बाहर होना पड़ा। भारत की टी20 टीम में प्रत्येक जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है और ऐसे में पराग को अभी तक टीम में वापसी का मौका नहीं मिला है। रॉयल्स के शीर्ष प्रबंधन को उन पर इतना भरोसा था कि संजू सैमसन के जाने के बाद ध्रुव जुरेल, यशस्वी जायसवाल और रविंद्र जडेजा जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अच्छा अनुभव रखने वाले खिलाड़ियों के बजाय उन्हें कप्तानी सौंप दी गई। आईपीएल के वर्तमान सत्र में भी पराग को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआती चरण में वह रन बनाने के लिए जूझ रहे थे।

इसके अलावा ड्रेसिंग रूम में वेपिंग (इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का उपयोग) करते हुए पकड़े जाने के बाद उन्हें हर तरफ से ट्रोल किया गया। राजस्थान रॉयल्स की टीम जब अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थी तब पराग ने टीम के खराब प्रदर्शन को खुलकर स्वीकार किया। इसके साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों पर कथित तौर पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने के लिए कमेंटेटरों और विशेषज्ञों की जमकर आलोचना की। मुंबई के खिलाफ करो या मरो मुकाबले में जिस तरह से पराग ने गेंदबाजी में बदलाव किए उससे आलोचक भी उनके मुरीद बन गए। उनके रणनीतिक बदलाव से राजस्थान रॉयल्स यह मैच जीत कर प्लेऑफ में जगह बनाने में सफल रहा। पराग अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करते हैं और मैच के बाद की उनकी टिप्पणियां इसका सटीक उदाहरण हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस सत्र में कई साहसिक फैसले लिए हैं। मुझे नेतृत्व करना पसंद है। मैं असम का नेतृत्व भी इसी तरह करता हूं। आपको जोखिम उठाना होगा, यह कोई जुआ नहीं है।’’ पराग के पिता प्रथम श्रेणी के क्रिकेटर रहे हैं और उनकी मां भारतीय तैराक हैं। जब वह महज 16 महीने के थे, तभी उन्होंने अपने हाथों में प्लास्टिक का बल्ला पकड़ लिया था। पराग ने इस तरह से इतना तो सुनिश्चित कर ही दिया है कि वह अगले साल भी राजस्थान रॉयल्स के कप्तान बने रहेंगे।

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