By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 18, 2026
खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ फसल संरक्षण की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चाय में दो कीटनाशकों- एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड के अवशेषों की अधिकतम सीमा (एमआरएल) तय करने का प्रस्ताव रखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को एक सरकारी बयान में कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चाय में एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड नामक दो कीटनाशकों के अवशेषों की अधिकतम सीमा निर्धारित करने के लिए मसौदा संशोधनों को अधिसूचित किया है। यह मसौदा विज्ञान आधारित खाद्य सुरक्षा नियमन और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने के एफएसएसएआई के जारी प्रयासों का हिस्सा है।
चाय क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सीमाओं से चाय उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं, खाद्य कारोबारियों, परीक्षण प्रयोगशालाओं और प्रवर्तन अधिकारियों को नियामकीय स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) किसी खाद्य पदार्थ में कीटनाशकों के अवशेषों की कानूनी रूप से अनुमत अधिकतम मात्रा निर्धारित करती है। ये सीमाएं वैज्ञानिक आकलन के आधार पर तय की जाती हैं, जिसमें कीटनाशक अवशेषों से संबंधित आंकड़ों, आहार के माध्यम से उनके शरीर में पहुंचने की मात्रा और सुरक्षा से जुड़े प्रासंगिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।
मंत्रालय ने बताया कि चाय में एसिटामिप्रिड के लिए प्रस्तावित 20 पीपीएम की सीमा जापान में निर्धारित 30 पीपीएम और अमेरिका में निर्धारित 50 पीपीएम की संबंधित सीमाओं से कम है। इमिडाक्लोप्रिड के लिए अधिकतम अवशेष सीमा भी अंतरराष्ट्रीय कोडेक्स मानकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह प्रस्ताव कीटनाशकों के अवशेषों से संबंधित मानकों की समीक्षा और संशोधन के लिए एफएसएसएआई के व्यापक नियामकीय दृष्टिकोण का हिस्सा है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (संदूषक, विषाक्त पदार्थ एवं अवशेष) संशोधन विनियम, 2024 में भी उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़ों और वैश्विक प्रथाओं के मद्देनजर अधिकतम अवशेष सीमाओं की समीक्षा की गई थी। इससे पहले नियामकीय उपायों के तहत अधिक विषाक्तता वाले पाए गए 13 कीटनाशकों को सूची से हटाना भी शामिल था। मंत्रालय ने कहा, प्रस्तावित मानकों में कृषि उत्पादन के दौरान प्रभावी कीट प्रबंधन के महत्व को भी स्वीकार किया गया है।
उचित तरीके से और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार इस्तेमाल किए जाने पर कीटनाशक किसानों को फसलों को कीटों से बचाने, फसल के नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादकता बनाए रखने में मदद करते हैं। भारत में प्रति हेक्टेयर कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम से भी कम है, जो 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के वैश्विक औसत से काफी नीचे है।