By अभिनय आकाश | Sep 22, 2026
G7 देशों के विदेश मंत्रियों ने यमन और सऊदी अरब पर हूथी गुट के लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। इन हमलों में आम नागरिकों और आम लोगों के इस्तेमाल वाली सुविधाओं को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही, उन्होंने ईरान से विद्रोही गुटों को हथियार और मदद देना बंद करने को कहा है। सोमवार को जारी एक बयान में G7 विदेश मंत्रियों ने कहा कि यमन के हालात से क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, नेविगेशन के अधिकारों और लाल सागर व बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है। यह बयान कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के साथ-साथ यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि ने जारी किया। बयान में कहा गया हम - कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के G7 विदेश मंत्री और यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि मानते हैं कि यमन के हालात क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, साथ ही नेविगेशन के अधिकारों और आज़ादी, और लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा के लिए एक अस्वीकार्य खतरा हैं।"
G7 ने ईरान से भी सीधे तौर पर हूतियों को अपना समर्थन बंद करने को कहा। बयान में आगे कहा गया, हम ईरान से आह्वान करते हैं कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों 1747, 2140 और 2216 का उल्लंघन करते हुए हूतियों को हथियार देना और समर्थन करना बंद करे। G7 ने कहा कि इन हमलों से तनाव और बढ़ने का खतरा है और ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नुकसान पहुंचा सकते हैं और व्यापक आर्थिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। साथ ही, समूह ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं - विशेष रूप से ऊर्जा, उर्वरक और भोजन की आवाजाही में लंबे समय तक व्यवधान को रोकने के लिए समुद्री सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। यह बयान यमन के सशस्त्र बलों द्वारा सऊदी अरब को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने के बाद आया है।