By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 12, 2026
महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में सरकारी सहायता-प्राप्त एक आवासीय विद्यालय में ज़हरीले सांप के काटने से हुई तीन आदिवासी लड़कियों की दुखद मौत ने इस स्कूल की खराब हालत और कथित लापरवाही की पोल खोल दी है, जिसके चलते मंगलवार को उसका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया और एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। यह घटना रविवार करीब आधी रात धनोरा तालुका से लगभग 10 किलोमीटर दूर जप्तलाई गांव के छात्रावास में हुई। छात्रावास के फ़र्श पर सो रही छह लड़कियों को एक ज़हरीले सांप ने डस लिया।
संबंधित आवासीय विद्यालय कांग्रेस के पूर्व मंत्री मारोतराव कोवासे चलाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद स्कूल में न तो शिक्षक हैं और न ही कोई वार्डन और वहां बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सिर्फ़ मुख्य सड़कों पर स्थित स्कूलों की ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ और अंदरूनी इलाकों के स्कूलों की भी जांच करें।
फडणवीस ने मुख्य सचिव से बैठक बुलाने और राज्य भर के आश्रमशालाओं के लिए एक व्यापक निरीक्षण व्यवस्था बनाने को कहा। आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल को इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उइके ने कहा कि रविवार रात जब सांप छात्रावास में घुसा तब 50 लड़कियां नीचे सो रही थीं।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सरकार महाराष्ट्र में लगभग 511 सहायता प्राप्त आदिवासी आवासीय स्कूलों का तीसरी पार्टी से ‘ऑडिट’ भी कराएगी। उइके ने सवाल उठाया कि इस आश्रम स्कूल को इस तरह कैसे चलाया जा रहा था कि लड़कियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गयी। इस घटना की विपक्ष ने कड़ी आलोचना की।
शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि गढ़चिरोली, नंदुरबार और चंद्रपुर में आदिवासी आवासीय स्कूलों की हालत खराब है। उन्होंने दावा किया कि वहां सांप और बिच्छू के काटने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसी कई मौतों का रिकॉर्ड ही नहीं रखा जाता।
एक विवादित बयान में राउत ने कहा कि आदिवासी लोगों को मंत्रियों के घरों में सांप और बिच्छू छोड़ देने चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि ऐसे स्कूलों में बच्चे किस तरह के डर का सामना करते हैं। उन्होंने गढ़चिरोली के प्रभारी मंत्री फडणवीस पर भी निशाना साधा और नैतिक आधार पर आदिवासी समुदाय के मंत्रियों से इस्तीफे की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया और महायुति सरकार के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
इस घटना को ‘बेहद गंभीर’ बताते हुए सपकाल ने सवाल उठाया कि क्या आदिवासी विकास विभाग ने यह सुनिश्चित किया था कि छात्रावास को पर्याप्त अनुदान और बुनियादी सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ स्कूल का लाइसेंस रद्द करने से सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकती; उनका तर्क था कि प्रशासन को सभी सहायता प्राप्त संस्थानों में उचित सुविधाओं और सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।