By दिव्यांशी भदौरिया | Sep 23, 2026
गणेश उत्सव की धूम देशभर में देखी जा रही है। भक्तजन जितनी श्रद्धा भाव और धूमधाम से बप्पा को अपने घर पर स्थापित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं। उतना ही गणपति की विदाई का समय भावनात्मक होता है। साधक अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं, कोई डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन तो कोई दस दिनों तक भगवान गणेश को विराजमान करते हैं।
अनन्त चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ समय
यदि आप 10वें दिन यानी के अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करते हैं, तो इस साल गणेश विर्सजन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को किया जाएगा।
-चतुर्दशी तिथि की शुरुआत: 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे
-चतुर्दशी तिथि की समाप्ति: 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे
-अनन्त चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: 25 सितंबर को सुबह 06:11 बजे से रात 11:06 बजे तक
-पूजा की कुल अवधि: 16 घंटे 55 मिनट
जानें अनंत चतुर्दशी का महत्व
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी या अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। इस दिन न केवल बप्पा की विदाई का है, बल्कि भगवान विष्णु के अनंत रुप की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। अनंत चतुर्दशी के दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु के साथ माता यमुना व शेषनाग जी की पूजा भी करते हैं।
अनंत सूत्र बांधा जाता है
अनंत चतुर्दशी के मौके पर सूत्र बांधने का विशेष नियम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सूत्र में साक्षात भगवान विष्णु का वास माना जाता है।
- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसके बाद पुरुष इसे अपने दाएं हाथ और महिलाएं अपने बाएं हाथ में बांधती हैं।
- इस धागे में कुल 14 गांठें लगाई जाती हैं।
- ये 14 गांठें पौराणिक मान्यताओं के 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
विसर्जन करते समय इन बातों का रखें ख्याल
- जब बप्पा का विसर्जन करें, तो पहले गणपति जी की आरती करें और उन्हें मोदक व लड्डू का भोग अर्पित करें।
- अनजाने में हुई सभी गलतियों की क्षमा मांगे और परिवार में सुख समृद्धि की प्रार्थना करें।
- इसके अलावा, मूर्ति को सम्मान के साथ किसी पवित्र जल स्रोत में ही प्रवाहित करें।