गंगूबाई हंगल ने कई बाधाओं को पार कर अपनी गायिकी को एक मुकाम तक पहुंचाया

By टीम प्रभासाक्षी | Jul 21, 2022

भारतीय शास्त्रीय संगीत की नब्ज पकड़ कर और किराना घराना की विरासत को बरकरार रखते हुए परंपरा की आवाज का प्रतिनिधित्व करने वाली गंगूबाई हंगल ने लिंग और जातीय बाधाओं को पार कर संगीत क्षेत्र में आधे से अधिक सदी तक अपना योगदान दिया। गंगूबाई का जन्म 5 मार्च 1913 को एक केवट परिवार में हुआ था। उनके संगीत कॅरियर के शिखर तक पहुंचने के बारे में एक अतुल्य संघर्ष की कहानी है। उन्होंने आर्थिक संकट, पड़ोसियों द्वारा जातीय आधार पर उड़ाई गई खिल्ली और भूख से लगातार लड़ाई करते हुए भी उच्च स्तर का संगीत दिया। कर्नाटक के एक गांव हंगल की रहने वाली गंगूबाई को बचपन में अक्सर जातीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा और उन्होंने जब गायकी शुरू की तब उन्हें उन लोगों ने गाने वाली कह कर पुकारा जो इसे एक अच्छे पेशे के रूप में नहीं देखते थे।

इसे भी पढ़ें: काका जैसी शोहरत हर किसी को नहीं मिला करती, पढ़ें राजेश खन्ना के जीवन के रोचक किस्से

संगीत के प्रति गंगूबाई का इतना लगाव था कि कंदगोल स्थित अपने गुरु के घर तक पहुंचने के लिए वह 30 किलोमीटर की यात्रा ट्रेन से पूरी करती थीं और इसके आगे पैदल ही जाती थीं। यहां उन्होंने भारत रत्न से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी के साथ संगीत की शिक्षा ली। किराना घराने की परंपरा को बरकरार रखने वाली गंगूबाई इस घराने और इससे जुड़ी शैली की शुद्धता के साथ किसी तरह का समझौता किए जाने के पक्ष में नहीं थीं। गंगूबाई को भैरव, असावरी, तोडी, भीमपलासी, पुरिया, धनश्री, मारवा, केदार और चंद्रकौंस रागों की गायकी के लिए सबसे अधिक वाहवाही मिली। उन्होंने एक बार कहा था कि मैं रागों को धीरे−धीरे आगे बढ़ाने और इसे धीरे−धीरे खोलने की हिमायती हूं ताकि श्रोता उत्सुकता से अगले चरण का इंतजार करे। 21 जुलाई 2009 को उनके निधन के साथ संगीत जगत ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के उस युग को दूर जाते हुए देखा जिसने शुद्धता के साथ अपना संबंध बनाया था और यह मान्यता है कि संगीत ईश्वर के साथ अंतरसंवाद है जो हर बाधा को पार कर जाती है।

प्रमुख खबरें

UP में विकास और Infrastructure प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हों, सीएम Yogi Adityanath के कड़े निर्देश

Delhi Police ने Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi पर दर्ज कीं 4 FIR

Elon Musk के अंबानी वाले सवाल पर बोले Rahul Gandhi, दूसरे व्यक्ति से मिलेंगे तो और पता चलेगा

विवाद में उलझा Arunachal Pradesh, Ranji Trophy के पहले मैच से बाहर होने का खतरा