By अभिनय आकाश | Jan 01, 2026
ईरान में जनता का विद्रोह 1989 की इस्लामिक क्रांति की याद दिला रहा है। 46 साल पहले की अगर बात की जाए तो जिस तरह इस्लामिक कट्टरपंथियों ने देश की चुनी हुई सरकार का तख्ता पलट किया है उसी तरह आवाम ईरान से मजहबी कट्टरपंथ वाली सत्ता को उखाड़ फेंकने पर आमादा नजर आ रही है। ईरान में मुल्ला लीव ईरान जैसे नारे सरेआम लग रहे हैं। पिछले तीन दिन से लगातार जोर पकड़ रहे इस आंदोलन में अब जेन-जेड भी कूद पड़े हैं। हिजाब को लेकर जिस जन क्रांति को 3 साल पहले हयातुल्ला अली खामई ने जोर जुल्म के दम पर दबा दिया था वो ईरान में अब नए न्यायों के साथ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया पर उबाल मार रही है। मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा। ईरान में तानाशाही बर्दाश्त नहीं।
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुआ महंगाई और मुद्रा रियाल की गिरावट के खिलाफ विरोध अब सरकार विरोधी आंदोलन में बदलता दिख रहा है। यहां तीसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहे। बुधवार रात कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी तथा राजशाही समर्थक नारे लगाए। इन नारों में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना था। तेहरान और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय और व्यावसायिक इलाके विरोध के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं।
कई जगह प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। विवि पर छापे भी पड़े। रिपोटों के मुताबिक, कुछ स्थानों पर आंसू गैस और लाइव फायर का भी इस्तेमाल किया गया। तेहरान में एक छात्र गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर हमले की धमकी ने भी असंतोष को और हवा दी है। सरकार ने कम से कम 17 प्रांतों में स्कूलों और सरकारी दफ्तरों को बंद करने की घोषणा की है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान के कई शहरों-मशहद, इस्फहान, जंजान, हमदान और मालार्ड में प्रदर्शन फैल चुके हैं और आर्थिक कुप्रबंधन से त्रस्त ईरानियों के साहस की सराहना की।