By नीरज कुमार दुबे | Jul 10, 2026
भारतीय सेना के नए प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पद संभालते ही पूरी सेना को साफ और सख्त संदेश दे दिया है कि अब किसी भी चुनौती के लिए हर समय तैयार रहना होगा। 6 जुलाई 2026 को अधिकारियों को भेजे गए "टुगेदर टुवर्ड्स एक्सीलेंस" शीर्षक वाले पत्र में उन्होंने युद्धक तैयारी को सेना की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर 2.0 और ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 जैसी किसी भी संभावित स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहें। सेना प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया कि अब केवल तैयारियों के दावे नहीं, बल्कि जमीन पर हर इकाई की वास्तविक क्षमता और हर पल मिशन के लिए तैयार रहने की स्थिति ही सबसे बड़ी कसौटी होगी।
जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों को चुनौतियों से निपटने के लिए व्यवहारिक सोच अपनाने का भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में आदर्श समाधान का इंतजार करने की बजाय सरल, प्रभावी और तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपाय तलाशने चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे छोटे सुधार भी युद्धक्षेत्र में बड़ा रणनीतिक लाभ दिला सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन प्रक्रियाओं ने वास्तविक युद्ध में अपनी उपयोगिता सिद्ध की है, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सेना को परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने, नई सोच अपनाने और हर चुनौती पर विजय पाने की क्षमता बनाए रखनी होगी, लेकिन जवाबदेही और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
अपने पत्र में सेना प्रमुख ने सेना की भूमिका को केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में सेना की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए केवल सैन्य दक्षता पर्याप्त नहीं, बल्कि व्यापक सोच, परिपक्व नेतृत्व और राष्ट्रीय दृष्टि की भी आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से लगातार अध्ययन करने, अपने ज्ञान को समृद्ध बनाने और बौद्धिक रूप से हमेशा आगे रहने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर छोटी समस्या का समाधान उच्च स्तर से मांगने की बजाय इकाई स्तर पर ही खोजा जाना चाहिए ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज और प्रभावी बन सके।
जनरल सेठ ने नेतृत्व की वास्तविक कसौटी भी स्पष्ट करते हुए कहा कि अधिकारी स्वयं उदाहरण बनें। वे शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम रहें, अपने सैनिकों के साथ कठिनाइयां साझा करें और ऐसा वातावरण तैयार करें जहां अधीनस्थ सम्मान के साथ काम कर सकें, नई सोच प्रस्तुत कर सकें, नवाचार कर सकें और सीमित दायरे में गलतियों से सीखने का अवसर भी प्राप्त कर सकें। उनका मानना है कि इसी संस्कृति से मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम सैन्य नेतृत्व तैयार होगा।
सेना प्रमुख ने एक और महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया अब एक नया रणक्षेत्र बन चुके हैं, जहां विरोधी ताकतें धुंधले युद्ध की रणनीति के तहत मानसिक और सूचनात्मक हमला करती हैं। उन्होंने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर अत्यधिक सतर्क, संयमित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का निर्देश दिया ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बन सके।
अपने संदेश के अंत में जनरल धीरज सेठ ने अधिकारियों को सर्वोच्च नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और विशेष रूप से पूर्व सैनिकों के प्रति सम्मान बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि कर्तव्य निभाने के साथ परिवार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। उनका स्पष्ट संदेश था कि सैनिक होना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन जीने का संपूर्ण तरीका है। उन्होंने अपने अधिकारियों की निर्णय क्षमता, पेशेवर दक्षता और कठिन परिस्थितियों में अडिग रहने की क्षमता पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए पूरे सैन्य नेतृत्व से हर पल तैयार रहने का आह्वान किया।
हम आपको यह भी बता दें कि सेनाध्यक्ष की ओर से सैन्य अधिकारियों को भेजे गये पत्र संबंधी खबर ऐसे समय सामने आई है जब जनरल धीरज सेठ ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी एवं पुंछ जिलों में अग्रिम इलाकों का दौरा किया और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, अभियानगत तैयारियों तथा सैनिकों की युद्ध तत्परता की समीक्षा की। सेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद जनरल सेठ की पुंछ के अग्रिम क्षेत्रों की यह पहली यात्रा थी। इस दौरान सेनाध्यक्ष को बदलते सुरक्षा माहौल, सैन्य तैनाती, निगरानी व्यवस्था, क्षेत्र में किए गए नए नवाचारों और समन्वित परिचालन तैयारियों की जानकारी दी गई।