Prabhasakshi's Newsroom | किसानों के भारत बंद से आम जनता परेशान, फिर उठी जातिगत जनगणना की मांग

By अंकित सिंह | Sep 27, 2021

आंदोलन के जरिए ही समाधान निकलता है? इस सवाल के जवाब में हर किसी को वर्तमान परिस्थिति में संशय जरूर होगा क्योंति किसान आंदोलन पिछले 11 महीने से जारी है लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं निकल सका है। आज एक बार फिर से संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत बंद का आह्वान किया है। भले ही संयुक्त मोर्चा का यह आंदोलन अपनी मांगों के लिए जायज हो सकता है परंतु यह भी सच है कि किसानों के इस भारत बंद की वजह से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बारे में हम आपको विस्तृत जानकारी देंगे। लेकिन साथ ही साथ यह भी बताएंगे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किस तरह से अपनी कार्यशैली को जारी रखते हैं और बिना आराम किए वह अपने काम को आगे बढ़ाते हैं। एक बार फिर से जाति आधारित जनगणना की मांग उठने लगी है वही ओडिसा और आंध्र प्रदेश में चक्रवात तूफान है।                         

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बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ में तब्दील हो गया। चक्रवात के प्रभाव से ओड़िशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गयी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बताया कि मई में तबाही मचाने वाले ‘यास’ तूफान के बाद चार महीनों में राज्य में आया यह दूसरा तूफान है। नरेंद्र मोदी ने भी ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी से बात की और चक्रवाती तूफान ‘गुलाब’ से उत्पन्न होने वाली किसी स्थिति से निपटने में केंद्र की ओर से मदद का भरोसा दिया। खबर है कि आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के रहने वाले दो मछुआरों की बंगाल की खाड़ी में उठे ‘गुलाब’ तूफान की चपेट में आने से मौत हो गई जबकि एक अब भी लापता है। 

प्रधानमंत्री मोदी अचानक नए संसद भवन का निर्माण कार्य देखने पहुंच गए। इस दौरान प्रधानमंत्री ने वहां लगभग 1 घंटे का वक्त बिताया और निर्माण कार्य का जायजा लिया। इस दौरान निर्माण कार्य में लगे लोगों से मोदी ने बातचीत की। यह इमारत सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है जिसे विपक्ष की आलोचना का शिकार होना पड़ा है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार 2022 में संसद का शीतकालीन सत्र नए भवन में होगा। संसद के नए भवन का क्षेत्रफल 64,500 वर्गफुट होगा। इसमें एक भव्य ‘कॉन्स्टीट्यूशन हाल’ होगा जिसमें भारत की लोकतांत्रिक धरोहर को संजोया जाएगा। 

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना की अपनी मांग को दोहराते हुए रविवार को कहा कि यह राष्ट्रीय हित में है और इससे विकास की दौड़ में पिछड़ रहे समुदायों की प्रगति में मदद मिलेगी। उच्चतम न्यायालय में केंद्र की ओर से दाखिल हलफनामे के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने संवाददाताओं से कहा कि यह बिल्कुल सही नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह मामला सीधे तौर पर जातिगत जनगणना के मुद्दे से संबंधित नहीं था। वहीं, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और मांग की कि देश में जाति आधारित जनगणना करायी जाए। 

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