Guru Amardas Birth Anniversary: 73 की उम्र में बने Guru, Sati प्रथा-जातिवाद पर किया था सबसे बड़ा प्रहार

By अनन्या मिश्रा | May 05, 2026

आज ही के दिन यानी की 05 मई को सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने समाज से जाति-प्रथा, सती प्रथा और कन्या हत्या जैसी तमाम कुरीतियों को खत्म करने के लिए आवाज उठाई थी। गुरु अमरदास जी ने 73 साल की उम्र में गुरु गद्दी संभाली थी। इसके अलावा उन्होंने लंगर प्रथा को मजबूत करने का काम किया था। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर गुरु अमरदास जी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

इसे भी पढ़ें: Tyagaraja Birth Anniversary: कर्नाटक संगीत के पितामह, जानें उनकी Ram Bhakti के अनसुने किस्से

तीसरे सिख गुरु

बता दें कि 61 साल की उम्र में अपने से 25 साल छोटे और रिश्ते में लगने वाले समधी गुरु अंगद देवजी को उन्होंने गुरु बना लिया। वहीं 11 सालों तक एकनिष्ठ भाव से गुरु सेवा की। सिखों के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देवजी ने अमर दास की सेवा से प्रसन्न होकर उनको 'गुरु गद्दी' सौंप दी।

इस तरह से गुरु अमर दास तीसरे सिख गुरु बने। इस दौरान समाज तमाम बुराइयों से ग्रस्त था। उस समय ऊंच-नीच, जाति-प्रथा, कन्या हत्या और सती प्रथा जैसी अनेक बुराइयां समाज में फैली थीं। ऐसे में गुरु अमर दास ने इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बड़ा और प्रभावशाली आंदोलन चलाया था। उन्होंने ऊंच-नीच और जाति प्रथा को खत्म करने के लिए लंगर प्रथा और अधिक सशक्त किया। उस दौर में भोजन करने के लिए जातियों के मुताबिक पंगते लगती थीं। लेकिन उन्होंने सभी के लिए एक पंगत में बैठकर लंगर करना अनिवार्य कर दिया था।

गुरु अमर दासजी ने सती प्रथा को समाप्त करने के लिए क्रांतिकारी कार्य किया था। उन्होंने इस घिनौनी रस्म को स्त्री के अस्तित्व का विरोधी मानकर इस प्रथा के खिलाफ जबरदस्त प्रचार किया था। जिससे कि महिलाएं इस कुप्रथा से मुक्ति पा सकें। वह सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाले पहले समाज सुधारक थे।

मृत्यु

वहीं 01 सितंबर 1574 को गुरु अमर दास जी दिव्य ज्योति में विलीन हो गए थे।

प्रमुख खबरें

Mira Road चाकूबाजी: ATS का दावा- आरोपी ISIS से प्रभावित, बचाव पक्ष बोला- उसे Schizophrenia है

Nepal के नए नियम के बाद बॉर्डर पर फंस गए 1000 से ज्याजा कंटेनर, मचा बवाल!

Assam Election Result की सटीक भविष्यवाणी से सब हैरान, CM Himanta का महीने पुराना Viral नोट हुआ सच

लोकमंगल के लिए था देवर्षि नारद का संवाद: प्रो. संजय द्विवेदी