By अभिनय आकाश | Aug 29, 2026
चीन ने जनरल झाओ ज़ोंगकी को देश की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था से हटा दिया है। झाओ ने 2017 के डोकलाम गतिरोध और 2020 में भारत के साथ गलवान घाटी झड़प के दौरान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वेस्टर्न थिएटर कमांड की कमान संभाली थी। बाद में यह खबर आई थी कि झाओ ने "भारत को सबक सिखाने" के लिए गलवान ऑपरेशन को मंज़ूरी दी थी। PLA का वेस्टर्न कमांड ही तिब्बत और शिनजियांग में, और भारत के साथ चीन की सीमा के बड़े हिस्से पर चीनी सैन्य अभियानों को नियंत्रित करता है। झाओ की 'चाइनीज़ पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस' (CPPCC) की सदस्यता छीन ली गई और उन्हें दो अन्य पदों से भी हटा दिया गया। बीजिंग ने न तो झाओ को हटाने की वजह बताई और न ही उनके खिलाफ किसी जांच का ऐलान किया। झाओ को हटाए जाने के बाद ऐसी अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वह PLA में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लंबे समय से चल रहे बड़े पैमाने पर सफाए (purge) की चपेट में आने वाले सबसे नए सीनियर मिलिट्री अधिकारी हैं।
एएनआई ने 2020 में अमेरिकी खुफिया जानकारी के आधार पर बताया था कि झाओ ने "भारत को सबक सिखाने" के लिए गलवान ऑपरेशन को मंज़ूरी दी थी। गलवान झड़प में भारत के बीस सैनिक मारे गए थे। चीन ने आधिकारिक तौर पर PLA के चार सैनिकों की मौत की बात मानी थी, हालांकि बाद की जांच में मामले को छिपाने की बात सामने आई और अनुमान लगाया गया कि कम से कम 38 चीनी सैनिक मारे गए थे। 2017 में इंडिया टुडे के तत्कालीन चीन संवाददाता अनंत कृष्णन ने रिपोर्ट दी थी कि 72 दिनों तक चले डोकलाम गतिरोध से निपटने के तरीके के लिए झाओ को ज़िम्मेदार माना गया था।