गजवा-ए-हिंद: भारत के खिलाफ अंतिम और निर्णायक युद्ध, फिर होगा इस्लाम का राज?

By अभिनय आकाश | Oct 20, 2021

मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में इन दिनों एक झूठी अफवाह की आड़ लेकर बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडालों, मंदिरों और हिंदुओं के घरों पर जैसे भीषण हमले किए गए, उससे यही साबित होता है कि इस देश में बचे-खुचे हिंदू समुदाय के लिए रहना दूभर होता जा रहा है। अब तो वहां इस्लामिक स्टेट सरीखे खूंखार आतंकी संगठन ने भी जड़ें जमा ली हैं। पाकिस्तान में तो हिंदुओं के दमन में वहां का शासन-प्रशासन और अदालतें भी लिप्त हैं। अफगानिस्तान में तो हिंदू और सिख खत्म होने के ही कगार पर हैं। कट्टरपंथी दूसरे धर्मों के लोगों को निशाना बना रहे हैं चाहे वो पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान या फिर बांग्लादेश। आज का विश्लेषण हमने कट्टरपंथी सोच और इसी सोच से उपजी एक थ्योरी जिसे पुरानी इतिहास की कुछ प्रसंगों का जिक्र कर कुछ अतिवादियों द्वारा समय-समय पर हवा दी जाती रहती है। जिसमें हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी शामिल है। आज आपको बताएंगे कि आखिर गजवा-ए-हिंद है क्या? इसकी वैचारिकी क्या है और कैसे आतंकी संगठन इस्लाम के नाम पर हिंसा फैलाने में इसकी मदद लेते हैं?

मुस्लिम धर्म के सिद्धांतों के अनुसार दुनिया दो भागों में विभाजित है-

पहला- दारुल इस्लाम: वह देश जहां मुस्लिम रहते हैं और मुस्लिमों का ही शासन है, उसे ‘दारुल इस्लाम’ कहते हैं।

दूसरा- दारुल हर्ब: जहां मुस्लिम रहते हैं, लेकिन शासन गैर-मुस्लिम करते हैं। 

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दारुल हर्ब ‘भारत’ को दारुल इस्लाम बनाना ही ‘गज़वा-ए-हिन्द’ 

इस्लामी सिद्धांत के अनुसार, भारत भूमि मुस्लिमों की हो सकती है लेकिन हिन्दुओं और मुस्लिमों, दोनों की नहीं हो सकती। इस्लामी सिद्धांतों के मुताबिक भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बनाने के लिए भारत के मुस्लिमों का ‘जिहाद’ की घोषणा करना न्यायसंगत है। इसका अर्थ यह हुआ कि दारुल हर्ब ‘भारत’ को दारुल इस्लाम बनाना ही ‘गज़वा-ए-हिन्द’ है। गजवा-ए-हिन्द का मतलब है काफिरों को जीतने के लिए किये जाने वाले युद्ध को “गजवा” कहते हैं और जो इस युद्ध में विजयी रहता है उसे “गाजी” कहते हैं, जिस भी आक्रान्ता और आक्रमणकारी के नाम के सामने गाजी लगा हो या जिसे गाजी की उपाधि दी गयी हो निश्चय हो वो हिन्दुओ के व्यापक नर संहार करके इस्लाम के फैलाव में लगा था।

हदीस में क्या कहा गया है?

सबसे पहले आपको हदीस के बारे में बताते हैं। मोहम्मद साहब की मौत के 200 सालों के बाद हदीस लिखी गई थी। हदीस अरबी शब्द है जिसका अर्थ रिपोर्ट है। दरअसल, इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पैगम्बर मोहम्मद अपने जीवन काल के दौरान सहबियों से जो बातें करते और कहते थे या उनके किसी सवाल के जवाब में कहते थे, उन्हें सहाबी (पैगंबर के साथी) याद कर लेते थे, फिर वो पैगंबर की ये बातें अपनी आने वाले पीढ़ियों को सुनाते थे। बाद में पैगंबर की इन बातों को संग्रहित कर लिया गया, जिन्हें हदीस कहते हैं।  हदीस के छह संग्रह हैं। कुरान में जिहाद का अर्थ है तपस्या लेकिन हदीस में जिहाद का अर्थ धर्मयुद्ध है। गजवा ए हिन्द का भी उल्लेख पहली बार हदीस में ही मिलता है। गजवा ए हिन्द का अर्थ है एक ऐसा युद्ध जो मोहम्मद साहब के निर्देश पर लड़ा जाए। इस मान्यता के अनुसार हर मुसलमान का कर्तव्य है कि वो ये सुनिश्चित करे कि दुनियाभर में बुतपरस्ती (मूर्तिपूजा) बंद होनी चाहिए। क्योंकि मूर्ति पूजा बंद होने के बाद ही दुनिया में इस्लाम का राज कायम हो सकता है।  

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हदीस को लेकर विवाद 

इस्लामी विद्वानों के बीच इसको लेकर संदेह बना रहता है कि कहीं किसी रावि ने पैगम्बर की वफ़ात (मृत्यु) के बाद अपने निजी स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए पैगंबर के नाम पर कोई झूठी हदीस तो नहीं पेश कर दी। विद्यानों ने कई छानबीन के बाद कुछ हदीसों को रद्द भी किया गया।

खुरासान से आई इस्लामिक सेना भारत पर करेगी हमला

इस्लामी भविष्यवाणाी के मुताबिक सीरिया से यह लड़ाई शुरू होगी। काले झंडे के साथ फौज खुरासान से आएगी और भारत को एक इस्लामी मुल्क में तब्दील किया जाएगा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक इसी गजवा ए हिंद के मकसद को पूरा करने के सपने देखते हैं। ऐसे ही मनसूबों के चलते है वह देश के अल्पसंख्यकों को काफिर मानते हैं और इस्लाम कबूल करवाना अपना मजहबी कर्तव्य मानते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि खुरासान जिस इलाके को कहा जाता है उसमें आज का अफगानिस्तान और पाकिस्तान और ईरान के कुछ इलाके शामिल हैं। कई हमले गजवा-ए-हिंद के तहत अब तक भारत में किए जा चुके हैं। इसी नारे के तहत समुदाय के युवकों का ब्रेनवॉश होता है और फिर उन्हें आत्मघाती हमलावर बनाया जाता है। कहते हैं कि इस नारे का मतलब समझाते हुए इस्लामी कट्टरपंथी युवकों को कयामत से पहले होने वाले एक युद्ध का पाठ पढ़ाया जाता है, जो हिंदू और मुस्लिमों में होगा और उसमें हिंदुओं के भारत पर मुस्लिम फतह हासिल करेंगे। 

मुस्लिम बाहुल देश इस्लाम को राष्ट्रधर्म मानने वाले बनते गए

हिन्दू दुनिया के 110 से ज्यादा देशों में रहते हैं लेकिन इसे मानने वालों की सबसे बड़ी आबादी भारत और नेपाल में रहती है। नेपाल किसी जमाने में एक मात्र हिन्दु राष्ट्र हुआ करता था लेकिन 2008 में नेपाल के संविधान में बदलाव करके उसे धर्मनिरपेक्ष देश का दर्जा दे दिया गया। जिस प्रकार भारत धर्मनिरपेक्ष है उसी प्रकार। साल 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के संविधान में 42वां संशोधन करते हुए प्रस्तावना में सेक्युलर शब्द जोड़ दिया था। यानि पिछले कुछ दशकों में भारत और नेपाल जैसे देशों में बहुसंख्यक हिन्दू पर तो धर्मनिरपेक्षता की पूरी जिम्मेदारी डाल दी गई। लेकिन मुस्लिम बाहुल देश सेक्युलर से इस्लाम को राष्ट्रधर्म मानने वाले देश बनते चले गए। 

 इस्लामिक देश 

 वर्ष देश
 1956  पाकिस्तान
 1979  ईरान
 1980 बांग्लादेश
 2005  इराक

ये देश या तो पूरी तरह से इस्लामिक देश बन गए या फिर इस्लाम को उन्होंने अपना राष्ट्रधर्म मान लिया। हैरानी की बात है कि इनमें से कई देश अपने नाम के आगे रिपब्लिक भी लगाते हैं जिसका अरबी भाषा में मतलब जमहूरियत होता है। 

कई देशों में इस्लाम का पालन च्वाइश नहीं बल्कि मजबूरी 

गांधी जी के सपनों ने उन्हें धोखा दिया, गांधी जी के अपनों ने ही उनके सपनों को तोड़ दिया। आगे चलकर यही धोखेबाजी भारत और पाकिस्तान के बंटवारे का आधार बनी। वर्ष 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तो वो एक धर्मनिरपेक्ष देश बन गया। जबकि पाकिस्तान आगे चलकर एक इस्लामिक देश में बदल गया। फिर वर्ष 1971 में भारत ने बांग्लादेश को आजादी दिलाई। लेकिन कुछ वर्षों के बाद बांग्लादेश ने भी इस्लाम को राष्ट्रधर्म के रूप में अपना लिया। हालांकि वर्ष 2018 में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने इसे संविधान के खिलाफ बता दिया था। पूरी दुनिया में करीब 181 करोड़ लोग इस्लाम को मानते हैं। इनमें से करीब 160 करोड़ लोग इस्लामिक देशों में रहते हैं। इनमें से ज्यादातर देशों में धर्म का पालन करना उनकी च्वाइश नहीं बल्कि मजबूरी है। क्योंकि लगभग सभी मुस्लिम देशों में धर्म के अपमान को अपराध माना जाता है। कुछ देशों में तो इसके लिए मौत की सजा का भी प्रावधान है। 

बांग्लादेश में हिन्दुओं को बनाया जा रहा निशाना

पाकिस्तान की सैन्य सरकार के अत्याचार के खिलाफ लड़कर भारत की मदद से साल 1971 में आजादी पाए पड़ोसी देश बांग्लादेश जो कि म्यांमार के रोहिंग्या संकट के समय अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर काफी मुखर था लेकिन वह आजकल अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसक हमलों को लेकर दुनियाभर में चर्चा का कारण बना हुआ है। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है।  बांग्लादेश में कट्टर संगठनों का प्रभाव काफी तेजी से बढ़ा है। पिछले 9 साल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को 3679 बार हमलों का सामना करना पड़ा।

कश्मीर की आज़ादी से गजवा ए हिन्द को जोड़ते आतंकी संगठन 

अलकायदा और जैश-ए-मोहम्म्द जैसे संगठन हिंदुस्तान और पाकिस्तान के कट्टरपंथियों को जिहाद की आग में झोंकने और खुद को स्थापित करने के लिए गज़वा-ए- हिन्द की हदीसों का इस्तेमाल करते है। भारत के साथ कश्मीर में छद्म युद्ध लड़ रहे पाकिस्तान और स्थानीय तथा विदेशी आतंकी संगठन इन हदीसों के प्रयोग मुस्लिम युवाओं को भड़काने और भारत के खिलाफ हथियार उठाने के लिए ब्रेनवाश करने में एक हथियार की तरह प्रयोग करते हैं। लश्कर-ए-तैयबा गज़वा-ए-हिंद को कश्मीर की आज़ादी से जोड़ता था। पाकिस्तान के कट्टरपंथी इन हदीसों को यह कहते हुए प्रमोट करते हैं कि पाकिस्तान का तो जन्म ही गज़वा-ए-हिन्द को पूरा करने के लिए हुआ है। मसूद अज़हर भी अपने जिहादी भाषणों में इन हदीसों का जम कर प्रयोग करता था। 

-अभिनय आकाश 

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