Global Market में गहराया आपूर्ति संकट, Brent Crude बढ़कर 101.60 डॉलर प्रति बैरल हुआ

By Ankit Jaiswal | Oct 07, 2026

कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिका और सऊदी अरब से जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने मध्य पूर्व से बढ़ती तेल आपूर्ति के कारण बनी राहत पर फिलहाल भारी असर डाला है। इसका असर आगे चलकर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका के मैक्सिको की खाड़ी में बन रहा एक तूफान तेल और गैस की आपूर्ति के लिए नई चिंता बन गया है। अमेरिकी मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह तूफान 2 दिनों के भीतर 2026 का पहला अटलांटिक तूफान बन सकता है। इसके रास्ते में अमेरिका के तेल और गैस से जुड़े कई अहम क्षेत्र आ सकते हैं।

जिन इलाकों पर तूफान का असर पड़ सकता है, वहां अमेरिका के करीब 15% कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इसके अलावा देश के लगभग 5% प्राकृतिक गैस उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है। 6 तेल शोधन संयंत्र भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। अमेरिका के खाड़ी तट वाले राज्यों में स्थित शोधन संयंत्र देश की कुल 18.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की शोधन क्षमता का करीब 50% हिस्सा रखते हैं।

गौरतलब है कि तेल बाजार के लिए चिंता केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब और यमन से जुड़ा तनाव भी आपूर्ति को लेकर बाजार में अनिश्चितता बढ़ा रहा है। सऊदी ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान ने मंगलवार को कहा था कि देश से तेल की आपूर्ति बढ़ रही है। पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन की क्षमता से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इसके जरिए करीब 5.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल भेजा जा रहा है।

तेल कारोबार कंपनी विटोल के प्रमुख के अनुसार, पिछले 7 से 10 दिनों में मध्य पूर्व से टैंकरों के जरिए करीब 12 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन तैयार पेट्रोलियम उत्पाद बाहर भेजे गए हैं। इससे बाजार में आपूर्ति को लेकर कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन दूसरी तरफ नए जोखिम कीमतों को नीचे आने नहीं दे रहे हैं।

अमेरिका से आए भंडार के आंकड़े भी पूरी तरह साफ तस्वीर नहीं देते। बाजार सूत्रों के अनुसार, 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिका का कच्चा तेल भंडार 2.09 मिलियन बैरल घटा। पेट्रोल का भंडार भी कम हुआ, जबकि डीजल जैसे उत्पादों का भंडार मामूली बढ़ा है। इससे बाजार में मांग और आपूर्ति को लेकर अलग-अलग संकेत मिल रहे हैं।

सऊदी अरब में बढ़ते तनाव ने भी तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है। सऊदी विमानन अधिकारियों के मुताबिक, जाजान और नजरान के हवाई अड्डों पर सोमवार शाम 2 बार हमले हुए। ये हमले सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच हुए हैं।

सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बल हूतियों से इलाका वापस लेने के लिए बड़ा सैन्य अभियान चला रहे हैं। कई सप्ताह तक हूतियों की बढ़त के बाद सऊदी अरब ने भी इस अभियान के समर्थन में हवाई हमले तेज किए हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर तेल आपूर्ति और शोधन व्यवस्था पर असर की आशंका बनी हुई है।

सिडनी स्थित एक्स एनालिस्ट्स के मुख्य तेल विश्लेषक मुकेश सहदेव ने कहा कि हमले और तेल शोधन संयंत्रों में रुकावटें कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती हैं। उनके मुताबिक अगर तनाव कम नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर के आसपास बनी रह सकती है।

ईरान को लेकर अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान में इस समय सत्ता किसके हाथ में है, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इससे पहले कहा था कि अमेरिका को अच्छी तरह पता है कि ईरान में उसका बातचीत वाला पक्ष कौन है और देश की निर्णय लेने की व्यवस्था किस तरह काम करती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में तेल बाजार की नजर अमेरिका के तूफान, मध्य पूर्व की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों से होने वाली आपूर्ति पर रहेगी। अगर आपूर्ति में बड़ी रुकावट आती है तो कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है, जबकि तनाव कम होने और उत्पादन सामान्य रहने पर बाजार को राहत मिल सकती है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं।

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