Explained Sensex-Nifty Crash | वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग... बाजार में हाहाकार मचने के 5 बड़े कारण

By रेनू तिवारी | Mar 23, 2026

भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी, सोमवार, 23 मार्च, 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारी गिरावट के साथ खुले। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक माहौल लगातार बिगड़ रहा है। जहाँ 30-शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 800.28 अंक या 1.07 प्रतिशत गिरकर 73,732.58 पर खुला, वहीं निफ्टी 290.15 अंक गिरकर 22,824.35 पर खुला। पिछले ट्रेडिंग सत्र में, सेंसेक्स 74,532.96 पर और निफ्टी 50 23,114.50 पर बंद हुआ था। इसी तरह, शुरुआती सत्र में व्यापक इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। जहाँ BSE मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 164.03 अंक या 1.07 प्रतिशत गिरा, वहीं BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 72.10 अंक या 1.01 प्रतिशत गिरकर 7,048.76 पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाज़ार में यह गिरावट तब आई जब शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे गिरकर 93.86 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुँच गया। इस बीच, वैश्विक बुलियन कीमतों में कमजोरी के चलते भारत में सोने और चाँदी की कीमतें भी भारी गिरावट के साथ खुलीं।

शुरुआती कारोबार में, बाज़ार का रुख़ नकारात्मक था; NSE पर 315 शेयरों में बढ़त के मुक़ाबले 2,035 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 115 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बाज़ार गिरने के 5 प्रमुख कारण-

1. अमेरिका-ईरान युद्ध और ट्रंप का अल्टीमेटम

मध्य-पूर्व में तनाव कम होने के बजाय और अधिक गहरा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि यदि 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' नहीं खोला गया, तो ईरान के ऊर्जा ढांचे को तबाह कर दिया जाएगा। जवाब में तेहरान ने भी अपने बिजली संयंत्रों पर हमले की स्थिति में जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है।

2. अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तनाव तब और बढ़ गया जब यह खबर आई कि ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया (अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डा) पर 2,500 मील की मारक क्षमता वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इस घटना ने युद्ध के और अधिक फैलने की आशंका को पुख्ता कर दिया है।

3. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 93.8925 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया है। युद्ध की शुरुआत के बाद से घरेलू मुद्रा में लगभग 3% की गिरावट आ चुकी है। कमजोर रुपया विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को बिकवाली के लिए उकसाता है और देश में आयातित महंगाई (Imported Inflation) को बढ़ाता है।

4. कच्चे तेल का 'शॉक'

ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% आयात करता है, ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने का सीधा असर राजकोषीय घाटे और चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ता है।

5. आर्थिक विकास (GDP) पर असर का डर

ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत की GDP विकास दर को 30-40 आधार अंक (bps) कम कर सकती है। यदि कीमतें 90 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष 27 के लिए विकास दर 7% से नीचे गिर सकती है।

इसे भी पढ़ें: New York LaGuardia Airport पर बड़ा हादसा! Air Canada Express का विमान ग्राउंड ट्रक से टकराया, कई यात्री घायल

विशेषज्ञों की राय

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वी.के. विजयकुमार का कहना है कि युद्ध कब समाप्त होगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इक्विटी मार्केट से पैसा बाहर निकल रहा है।

प्रमुख खबरें

FIH Nations Cup में जीत के बाद बोलीं Savita Punia- अच्छा Dressing Room माहौल ही सफलता की कुंजी

PCOS Weight Loss: PCOS में Weight Loss बना चैलेंज? Diet और Lifestyle में करें ये 4 बदलाव, तुरंत दिखेगा असर

West Bengal में BJP का पहला Budget: कर्मचारियों को DA Hike, पेंशन बढ़ी, बेरोजगारों के लिए भी तोहफा

PCOS Diet Plan: PCOS को कंट्रोल करेगा ये Superfood, महिलाएं अपनी Diet में आज से ही शामिल करें ये 5 चीजें