वैश्विक युद्ध संकट की आंच भारत के रसोई तक! खाद्य तेलों की कीमतों में भारी उछाल, सरकार से स्टॉक बनाने की मांग

By रेनू तिवारी | Mar 15, 2026

ईरान तथा अमेरिका एवं इजराइल के बीच युद्ध जारी रहने तथा खाड़ी देशों से मालवाहक पोतों की आवाजाही लगभग ठप होने के चलते कच्चे तेल एवं खाद्य तेलों की आपूर्ति घटने की आशंकाएं बढ़ने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह लगभग सभी खाद्य तेल-तिलहनों की कीमतों में मजबूती का रुख रहा। बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में पिछले सप्ताह बाजार मजबूत होने तथा खाद्य तेल एवं रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित रहने की आशंकाओं के बीच मांग में अचानक उछाल आया है।

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उन्होंने कहा कि कांडला बंदरगाह पर पहले सोयाबीन डीगम तेल के मुकाबले पाम-पामोलीन का दाम का अंतर लगभग 100 डॉलर प्रति टन नीचे था लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ यह अंतर अब घटकर 10-20 डॉलर प्रति टन का ही रह गया है। ऐसे में सरकार को समय रहते सोयाबीन की बिक्री तुरंत रोकने तथा सरसों की यथासंभव खरीद शुरू करने के बारे में विचार करना चाहिये। मुश्किल के इस वक्त में सोयाबीन का स्टॉक रखना बहुत जरूरी है।

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इससे किसानों का मनोबल भी बना रहेगा और बिजाई का रकबा प्रभावित नहीं होगा। जरूरत की स्थिति में सरकार बाजार हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाल भी सकेगी। इसी प्रकार सरकार को मूंगफली का भी स्टॉक रखने के लिए इसकी बिक्री रोक देनी चाहिये। सरसों और मूंगफली तेल का कोई विकल्प भी नहीं है। सूत्रों ने कहा कि आयात कम होने की वजह से आज सूरजमुखी तेल बंदरगाह पर 10-11 रुपये प्रति किलो के प्रीमियम पर बिक रहा है।

इसकी रिफाइनिंग लागत और मुनाफा जोड़ने के बाद दाम 162 रुपये किलो बैठता है लेकिन युद्ध संकट के कारण आयात कम होने की वजह से यह 172-173 रुपये किलो के भाव बिक रहा है। ऐसे किसी वक्त से निपटने के लिए सोयाबीन, मूंगफली का स्टॉक रखना हितकारी हो सकता है। इस दिशा में सरकार को जल्द से जल्द सरसों की खरीद करते हुए इसका पर्याप्त स्टॉक बना लेना चाहिये।

बेशक इसके लिए किसानों को कुछ बोनस भी देकर खरीद की जा सकती है। अभी बाजार में स्टॉकिस्ट भी सक्रिय हैं जिनके हाथ बिक्री होने से सरकार के पास स्टॉक जमा नहीं हो पायेगा और कीमत बढ़ने पर वह बाजार हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं होगी। यह भी ध्यान रखना होगा कि एक ओर तो बाजार में स्टॉक कम है दूसरी ओर, देश में खपत हर साल लगभग पांच प्रतिशत बढ़ जाती है। देश के प्रमुख तेल संगठन सोपा ने भी इस संदर्भ में अपनी चिंता रखी है।

सोपा ने कहा कि पिछले साल 25 फरवरी को हमारे देश में सोयाबीन का स्टॉक 68 लाख टन का था तो वर्ष 2026 के फरवरी महीने में घटकर मात्र 58.41 लाख टन ही रह गया है। यह स्थिति भी हमें विशेषकर युद्ध के माहौल में तिलहनों का स्टॉक बनाकर रखने की जरूरत को रेखंकित करती है। सूत्रों ने कहा कि कपास नरमा की आवक भी कल 80-90 हजार गांठ से घटकर शनिवार को 60 हजार गांठ रह गई जिससे बीते सप्ताहांत बिनौला तेल कीमत में भी सुधार देखने को मिला।

सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 100 रुपये के सुधार के साथ 6,700-6,725 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 150 रुपये के सुधार के साथ 13,900 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 25-25 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 2,350-2,450 रुपये और 2,350-2,495 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 50-50 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 5,650-5,700 रुपये और 5,250-5,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 750 रुपये के सुधार के साथ 15,550 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 400 रुपये के सुधार के साथ 14,900 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 400 रुपये के सुधार के साथ 11,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। मूंगफली तिलहन का दाम भी 25 रुपये के सुधार के साथ 7,000-7,475 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 50 रुपये के सुधार के साथ 16,900 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 15 रुपये के सुधार के साथ 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

समीक्षाधीन सप्ताह में कारोबारी धारणा में आम मजबूती के रुख के अनुरूप, सीपीओ तेल का दाम 700 रुपये के उछाल के साथ 13,050 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 550 रुपये के उछाल के साथ 14,750 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 600 रुपये के उछाल के साथ 13,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। तेजी के आम रुख के अनुरूप, बिनौला तेल का दाम 300 रुपये की मजबूती दर्शाता 14,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

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