By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 01, 2026
पणजी, एक सितंबर गोवा विधानसभा ने राज्य के उस कानून में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य चिकित्सा सेवा कर्मियों के खिलाफ हिंसा और स्वास्थ्य संस्थानों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को रोकना है। इसके तहत कानून के एक महत्वपूर्ण प्रावधान में “दोषी” शब्द को “आरोपी” शब्द से बदल दिया गया है। गोवा चिकित्सा सेवा कर्मी और चिकित्सा सेवा संस्थान (हिंसा की रोकथाम और संपत्ति को नुकसान या हानि) (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत वर्ष 2013 के अधिनियम की धारा 6(3) में संशोधन प्रस्तावित किया गया।
उसके अनुसार 2013 के अधिनियम का मसौदा तैयार करते समय गलती से ‘‘आरोपी’’ की जगह ‘‘दोषी’’ शब्द का इस्तेमाल हो गया था। सरकार ने कहा कि ‘‘दोषी’’ शब्द के इस्तेमाल से कानूनी असंगति पैदा हो रही थी, क्योंकि किसी व्यक्ति को अदालत द्वारा उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपराध साबित किए जाने के बाद ही दोषी ठहराया जा सकता है। उसने कहा कि किसी अपराध के आरोप का सामना कर रहे व्यक्ति के लिए, दोष सिद्ध होने से पहले की कार्यवाही में ‘‘आरोपी’’ शब्द का इस्तेमाल अधिक उपयुक्त माना जाता है।
सरकार ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य चिकित्सा सेवा कर्मियों और संस्थानों की सुरक्षा से जुड़े कानून के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कानूनी स्पष्टता और सटीकता सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने विधेयक पेश किया। संशोधित कानून इसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होगा।