Goa Liberation Day: गोवा मुक्ति दिवस आज, जानें क्या है इसका इतिहास और क्यों महत्वपूर्ण है 19 नवंबर

By रितिका कमठान | Dec 19, 2022

भारत की आजादी को लेकर माना जाता है कि देश अंग्रेजों के शासन से 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था। मगर भारत तब पूरी तरह से आजाद नहीं हुआ था। भारत के गोवा में पुर्तगालियों का कब्जा भी था। गोवा पर पुर्तगालियों ने पूरे 450 वर्षों तक शासन किया था। वहीं भारतीय सैनिकों ने दमखम दिखते हुए महज 36 घंटों में पुर्तगालियों के कब्जे से गोवा को मुक्त कराया था। हालांकि भारतीय सेना में आजादी के 14 साल बाद ये काम किया था। गोवा को 1961 में 19 दिसंबर के दिन आजादी मिली थी। इसके साथ ही भारत भी पूरी तरह से आजाद हुआ था। गोवा को मिली आजादी के बाद हर वर्ष इस दिन गोवा मुक्ति दिवस मनाया जाता है।

तीसरी सदी ईसा पूर्व से गोवा का इतिहास शुरू होता है। मौर्य वंश के शासन से गोवा की स्थापना हुई थी। इसके बाद पहली सदी की शुरुआत में गोवा पर कोल्हापुर के सातवाहन वंश ने शासन किया। इनके बाद लगभग 750 वर्षों तक गोवा पर चालुक्य शासकों का शासन रहा। गोवा पर समय समय पर कई लोग शासन करते आए है। गोवा में दिल्ली की सल्तनत ने वर्ष 1312 पर कब्जा किया मगर वो अधिक समय तक यहां शासन नहीं कर सके। विजयनगर के शासक हरिहर प्रथम ने दिल्ली से शासन छीन कर अगले 100 वर्षों तक गोवा पर कब्जा किए रखा। इसके बाद 1496 ने फिर से दिल्ली की सल्तनत ने गोवा पर कब्जा किया।

पुर्तगालियों ने किया शासन

भारत में मुगल राज के दौरान वर्ष 1510 में अलफांसो द अलबुकर्क की अगुवाई में पुर्तगाल ने गोवा पर आक्रमण किया और यहां उसका कब्जा हो गया। पुर्तगाल को खदेड़ने के लिए यूसुफ आदिल खां ने गोवा पर हमला किया। मगर वो अल्बुकर्क को रोकने में सफल नहीं हो सके। गोवा की पूर्व दिशा में समूचे पुर्तगाली साम्राज्य की राजधानी बनाई गई। वर्ष 1575 से 1600 के बीच इस शहर में अपना स्‍वर्णीम काल देखा।

अंग्रेजों ने किया गोवा पर कब्जा

नेपोलियन ने 1809-1815 के बीच पुर्तगाल पर कब्जा किया। इसके बाद गोवा में एंग्लो पुर्तगाली गंठबंधन आया। अंग्रेजों का शासन गोवा पर भी हो गया। अंग्रेजों ने गोवा में 100 वर्षों से अधिक यानी 1815 से 1947 तक शासन किया। हालांकि जब वर्ष 1947 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो पंडित जवाहरलाल नेहरू ने गोवा पर भारत का अधिकार मांगा। इसी बीच पुर्तगाल ने गोवा पर अपना दावा ठोक दिया। अंग्रेजी हुकूमत ने पुर्तगाल का साथ देते हुए गोवा पर पुर्तगाल का शासन रहने दिया।  

गोवा में हुआ आंदोलन

भारत को अंग्रेजों से वर्ष 1947 में आजादी मिली थी। हालांकि गोवा को आजादी से वंचित ही रहा था। गोवा 1947 के बाद भी पुर्तगालियों के कब्जे में रहा था। गोवा में आजादी का संघर्ष लगभग 14 वर्षों तक जारी रहा था। इसके बाद यहां भी गोवा की आजादी की मांग उठने लगी थी। गोवा के राष्ट्रवादियों ने मिलकर 1928 में मुंबई में 'गोवा कांग्रेस समिति' का गठन किया था, जिसने गोवा मुक्ति की मांग उठानी शुरू की थी। समिति के अध्यक्ष डॉ.टी.बी.कुन्हा थे जो गोवा के राष्ट्रवाद के जनक माने जाते है।

भारतीय सेना ने 36 घंटे में किया पुर्तगालियों का सफाया

भारत को आजादी मिलने के बाद भारत सरकार ने कई बार पुर्तगालियों से आग्रह किया कि वो गोवा को छोड़ दें मगर पुर्तगालियो ने इस विनती पर गौर नहीं किया। गोवा में इस दौरान लगातार आजादी की मांग की जाती रही। आंदोलनकारियों ने दादर और नागर हवेली पर कब्जा किया। इसके बाद भारतीय सेना ने 1961 में गोवा पर हमला बोला।  मेजर जनरल के.पी. कैंडेथ को '17 इन्फैंट्री डिवीजन' और '50 पैरा ब्रिगेड' को गोवा को आजाद कराने की जिम्मेदारी दी गई। वहीं हवाई अभियान का नेतृत्व एयर वाइस मार्शल एरलिक पिंटो ने किया। तीनों सेनाओं ने मिलकर 2 दिसंबर को गोवा मुक्ति अभियान की शुरुआत की।

भारतीय वायुसेना ने 8-9 दिसंबर को पुर्तगालियों के ठिकानों पर बमबारी कर उन्हें नष्ट किया। गोवा को अपने कब्जे में लेने के लिए 18 दिसंबर 1961 को जमीनी कार्रवाई की गई। इस सैन्य अभियान को ऑपरेशन विजय का नाम दिया गया। वायु, थल और नौ सेना ने मिलकर अभियान चलाया और सिर्फ 36 घंटों के भीतर गोवा को आजाद कर दिया। गोवा की मुक्ति को लेकर पुर्तगाली गवर्नर मेन्यू वासलो डे सिल्वा ने भी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दमन दीव के साथ गोवा भी पुर्तगाल के शासन से मुक्त हो गया। गोवा को 1987, 30 मई में पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया जिसके बाद गोवा 25वां राज्य बना। 

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