By अनन्या मिश्रा | Sep 25, 2026
हिंदू धर्म में देवी सरस्वती को कला और ज्ञान की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को वेदों की माता भी कहा जाता है। देवी सरस्वती का स्वरूप निर्मल चांद की ओर जिनके मुख पर दिव्य चमक है। पीत और श्वेत रंग के वस्त्र पहने और उनको कमल के फूल पर विराजमान और हाथों में वीणा धारण किए दिखाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नियमित रूप से मां के मंत्रों का जाप सच्चे मन से करता है, उसको मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देवी सरस्वती के कुछ खास मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका जप करने से आप स्वयं में बड़ा बदलाव महसूस कर सकेंगे।
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मंत्र- ऊं ब्रह्म ज्ञानायै नम:
इस मंत्र का अर्थ है कि मैं ब्रह्मांड में मौजूद उस चेतन बुद्धि की शक्ति को नमन करते हैं। यह मंत्र देवी सरस्वती के उस शक्ति रूप को वर्णित करता है, जोकि खुद ब्रह्मांड की बुद्धि के पीछे मौजूद हैं।
जो भी व्यक्ति खगोल, भौतिकी या अलग-अलग तरह के रसायन विज्ञान और अन्य तरह के विषयों का अध्ययन करता है, उनको इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
मंत्र - ऊं महा विद्यायै नम:
इस मंत्र का अर्थ है कि महान ज्ञान के पीछे स्थित और इससे उत्पन्न करने वाली शक्ति को नमन करते हैं। मां सरस्वती को महान ज्ञान और उसकी अनुभूति के पीछे स्थित शक्ति के रूप में इस मंत्र को वर्णित किया जाता है।
जो भी लोग धर्म के विचारों और ग्रंथों में गहराई से उतारने की कोशिश करते हैं। जिससे किसी भी धर्म या संस्कृति के शास्त्रों के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। यह मंत्र धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों की बौद्धिक क्षमताओं को भी अधिक तेज बनाने का काम करता है।
मंत्र- वेदानां मातरं पश्य मत्सथां देवीं सरस्वती।
इस मंत्र का अर्थ है कि देखो, वेदों की माता मां सरस्वती मुझमें निवास करती हैं।
इन तीनों मंत्रों में मां सरस्वती को ब्रह्मांड में मौजूद बुद्धि, ज्ञान को उत्पन्न करने वाली शक्ति और अंदर निवास करने वाली वेदों की मां के रूप में पुकारा गया था।