By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 31, 2026
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत शनिवार को 3,200 रुपये गिरकर 10 महीने के निचले स्तर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं की भारी बिकवाली के बीच सोने में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 3,200 रुपये टूटकर सभी करों सहित 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया।
यह 4,200 रुपये टूटकर सभी करों सहित 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि शुक्रवार को इसका भाव 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम था। चांदी इससे पहले आठ दिसंबर, 2025 को इस स्तर के आसपास थी, जब इसका भाव 1,85,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। निवेश फर्म 360 वन एसेट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं कोष प्रबंधक राहुल खेतावत ने कहा, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंताएं बढ़ने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी टिप्पणियों से सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा।
उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों से मौद्रिक नीति में नरमी की उम्मीदें कमजोर हुईं और कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को हाजिर सोना 145.84 डॉलर यानी करीब चार प्रतिशत टूटकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यह एक साल से अधिक समय का इसका सबसे निचला स्तर है।
इससे पहले तीन अक्टूबर, 2025 को सोना 3,887.09 डॉलर प्रति औंस के आसपास था। हाजिर चांदी भी 3.04 डॉलर यानी छह प्रतिशत गिरकर 49.12 डॉलर प्रति औंस रह गई। इससे पहले छह नवंबर, 2025 को इसका भाव 48.02 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के जिंस विश्लेषक मानव मोदी ने कहा कि सोना 3,800 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया, जबकि चांदी 50 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गई। शंघाई में वायदा अनुबंधों में भी तेज गिरावट आई, हालांकि खासकर चांदी के मामले में वे वैश्विक बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर बने रहे। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और महंगाई के बने रहने से दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंकाएं फिर बढ़ गई हैं।
इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की संभावना मजबूत हुई है। मोदी ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण निवेशकों को मजबूरी में बिकवाली करनी पड़ी और नकदी जुटाने का दबाव बढ़ा। वहीं, औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की अधिक उपयोगिता ने इसकी कीमतों में गिरावट को और बढ़ा दिया।
चीन में निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोना बेचने की खबरें भी एक संभावित कारण हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले सट्टेबाजी के तहत बिकवाली की स्थिति भी बन रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को मिलने वाला बहुमत सर्राफा कीमतों की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।