By Ankit Jaiswal | Feb 09, 2026
पिछले सप्ताह सोने की कीमतों में अचानक आई तेज हलचल ने निवेशकों को चौंका दिया है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों में हलचल पैदा कर दी है।
बता दें कि अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस उतार-चढ़ाव के पीछे चीन में बढ़ी सट्टेबाजी को एक अहम कारण बताया हैं। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि चीन में ट्रेडिंग गतिविधियां कुछ हद तक “बेकाबू” हो गई थीं, जिसके चलते वहां के नियामकों को मार्जिन नियम सख्त करने पड़े।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बेसेंट ने इसे पारंपरिक सट्टा उछाल का उदाहरण बताया, जहां कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं और फिर उतनी ही तेजी से नीचे आती हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब सोने की कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने के बाद अचानक फिसल गईं और निवेशकों के भरोसे को झटका लगा है।
गौरतलब है कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने में यह तेजी केवल सुरक्षित निवेश की मांग से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर सट्टा पोजिशन, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर बढ़ती चिंताओं से भी जुड़ी हुई थीं। इन कारणों ने मांग को तो बढ़ाया, लेकिन बाजार को बेहद संवेदनशील भी बना दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि लीवरेज्ड ट्रेड और मार्जिन पर किए गए सौदों ने गिरावट को और तेज कर दिया, जिससे कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी दौरान अन्य बाजारों पर भी इसका असर देखने को मिला है।
बताया जा रहा है कि इस उथल-पुथल के बीच अमेरिकी डॉलर ने जनवरी की शुरुआत के बाद पहली बार साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। निवेशकों ने जोखिम से जुड़ी अपनी रणनीतियों में बदलाव किया, जिसका असर करेंसी बाजार पर साफ दिखा है।
हालांकि, शेयर बाजारों ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई है। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज पहली बार 50,000 के स्तर के पार पहुंच गया, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट आय को लेकर सकारात्मक धारणा का संकेत देता है।
स्कॉट बेसेंट की टिप्पणियों ने मार्जिन नियमों की भूमिका पर भी ध्यान खींचा हैं। उन्होंने इशारा किया कि चीन में सट्टा गतिविधियों पर काबू पाने के लिए मार्जिन आवश्यकताओं को कड़ा किया गया हैं, जो अक्सर अत्यधिक तेजी को रोकने का एक तरीका माना जाता हैं।
फिलहाल अमेरिका की ओर से किसी तत्काल नीतिगत कदम का संकेत नहीं दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मौद्रिक नीति को लेकर सवाल बने रहेंगे, तब तक सोने और अन्य बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।