By Sumit Nirwal | Sep 23, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते कदमों का सबसे बड़ा असर ब्लू-कॉलर कर्मचारियों के बजाय व्हाइट-कॉलर और तकनीकी पेशेवरों के रोजगार पर पड़ना शुरू हो गया है। वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की इज एआई इम्पैक्टिंग ग्लोबल लेबर मार्केट्स शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, पूरी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर छंटनी अभी भले ही सीमित हो, लेकिन नॉलेज-बेस्ड और आईटी सेक्टर में नई भर्तियों पर भारी दबाव साफ दिखने लगा है।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जहां-जहां जनरेटिव एआई और ऑटोमेशन टूल्स का इस्तेमाल आसानी से संभव है, वहां कंपनियों ने अपनी भर्ती नीतियों में तेज बदलाव किया है। इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण कॉल सेंटर सेक्टर में देखने को मिला है। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कॉल सेंटर रोजगार ऐतिहासिक स्तर की तुलना में 39 प्रतिशत नीचे चल रहा है। इसी तरह कनाडा में यह स्तर सामान्य ट्रेंड से 33 प्रतिशत और जर्मनी में 27 प्रतिशत तक कम दर्ज किया गया है।
सॉफ्टवेयर और आईटी कंपनियों के अलावा मैनेजमेंट कंसल्टिंग, सॉफ्टवेयर पब्लिशिंग और विज्ञापन सेवाओं जैसी अन्य ज्ञान-आधारित पेशेवर सेवाओं में भी नए रोजगार के अवसरों में गिरावट आई है। रिपोर्ट का आकलन है कि वर्तमान में यह तकनीक कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर सेवामुक्त करने के बजाय रूटीन और डिजिटल कामों में नई रिक्तियों के सृजन को धीमा कर रही है। फिलहाल ब्लू-कॉलर नौकरियों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं दिखा है, लेकिन जैसे-जैसे स्वचालन तकनीक अन्य उद्योगों में फैलेगी, वैश्विक श्रम बाजार की जरूरतें और कंपनियों की हायरिंग रणनीतियां व्यापक बदलाव के दौर से गुजर सकती हैं।