By अनन्या मिश्रा | Nov 06, 2026
सनातन धर्म में धनतेरस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। धनतेरस से 5 दिवसीय पर्व की शुरूआत होती है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी जातक धनतेरस पर विधिविधान से मां, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा-अर्चना करते हैं, उनको सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इस बार 06 नवंबर 2026 को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है और समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट क्यों हुए थे।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक अमृत की प्राप्ति और देवताओं की खोई शक्ति और वैभव को प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया था। तब समुद्र मंथन के दौरान 14 दिव्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी। वहीं कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के समय अमृत का कलश लेकर भगवान धन्वन्तरि अवतरित हुए थे। तभी से भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य दिवस के रूप में धनतेरस मनाया जाता है।
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बता दें कि भगवान धन्वंतरि को श्रीहरि विष्णु का अंशावतार और देवताओं का वैद्य भी माना जाता है। जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए, तो उनके दोनों हाथों में अमृत कलश था। यह अमृत देवताओं को निरोगी, अमर और शक्तिशाली बनाने के लिए था। जिससे कि देवता असुरों से अपना राजपाट वापस ले सकें। इसी कारण भगवान धन्वंतरि को चिकित्सा और आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। विष्णु पुराण और अग्नि पुराण में भगवान धन्वंतरि के समुद्र मंथन से प्रकट होने की कथा का वर्णन मिलता है।
भगवान धन्वन्तरि धनतेरस के दिन प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विधिविधान से पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में कोई कमी नहीं होती है।
इसके अलावा धनतेरस पर मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विधान है। जिससे कि घर-परिवार को धन लाभ के अलावा सेहतमंद जीवन और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।