ममता कर रहीं विपक्ष की मोर्चेबंदी, क्या गोपाल कृष्ण गांधी पर लगेगी मुहर ? शरद पवार के इनकार के बाद चल रहा नाम

By अनुराग गुप्ता | Jun 15, 2022

नयी दिल्ली। साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है और इसकी अगुआई पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी कर रही हैं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार का नाम फाइनल करने के लिए ममता बनर्जी ने विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई। इस बैठक से आम आदमी पार्टी, टीआरएस और बीजद ने किनारा किया। जबकि 16 विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। जिनके स्वागत के लिए ममता बनर्जी खुद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के गेट पर खड़ी रहीं। 

राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से शरद पवार ने इनकार कर दिया है। ऐसे में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी का नाम सबसे आगे चल रहा है। बताया जा रहा है कि वामदलों ने इस नाम का सुझाव दिया। जिसको लेकर कई दलों के बीच सहमति बन गई है। हालांकि कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में हो रही बैठक में ही राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर अंतिम राय बन सकती है। इस बैठक में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआईएमएल, आरएसपी, शिवसेना, एनसीपी, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, जेडीएस, डीएमके, आरएलडी, आईयूएमएल और जेएमएम के नेता शामिल हुए हैं।

कौन हैं गोपाल कृष्ण गांधी ?

गोपाल कृष्ण गांधी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं। इसके अलावा वो पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रह चुके हैं और पूर्व में आईएएस अधिकारी थे। साल 2017 में गोपाल कृष्ण गांधी को विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था लेकिन उन्हें उपराष्ट्रपति चुनाव में एम वेंकैया नायडू के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 77 वर्षीय पूर्व नौकरशाह ने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी काम किया है।

सूत्रों ने बताया कि वामदलों ने महात्मा गांधी के पोते का नाम आगे बढ़ाया गया है। जिस पर करीब-करीब हर विपक्षी पार्टी ने अपनी सहमति जता दी है। हालांकि कांग्रेस का रूख अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके अलावा इस विषय पर सोचने के लिए गोपाल कृष्ण गांधी ने कुछ समय मांगा है। 

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अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट 'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के मुताबिक, गोपाल कृष्ण गांधी ने बताया कि मुझसे पूछा गया है कि अगर मेरे नाम पर आम सहमति बनती है तो क्या मैं ऐसे उम्मीदवार होने पर विचार करूंगा। मैंने कहा है कि मुझे इस महत्वपूर्ण सुझाव के बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधितों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है। इस समय ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगी। रामनाथ कोविंद के उत्तराधिकारी का चुनाव 18 जुलाई को होगा।

पिछले राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद ने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मीरा कुमार को हराया था। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष संयुक्तरूप से किसे उम्मीदवार बनाता है।

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