गोस्वामी की गिरफ्तारी पर बोले संजय राउत, MVA ने कभी बदले की भावना से नहीं की कार्रवाई

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 04, 2020

मुंबई। रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी को कथित रूप से एक इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किये जाने के संदर्भ में शिवसेना नेता संजय राउत ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र विकास आघाडी (एमवीए) सरकार ने पिछले साल सत्ता में आने के बाद से कभी किसी के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की। राउत ने यह दावा भी किया कि राज्य सरकार या किसी राजनीतिक दल का गोस्वामी की गिरफ्तारी से कोई लेना-देना नहीं है। गोस्वामी को 2018 में 53 वर्ष के एक इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बुधवार को रायगढ़ पुलिस ने मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया। 

शिवसेना के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘‘राज्य सरकार या किसी राजनीतिक दल का गिरफ्तारी से कोई लेना-देना नहीं है।’’ महाराष्ट्र के मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक ने गोस्वामी की गिरफ्तारी को ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड का भाग-2’ कहा और इस नाम के एक अपराध आधारित टीवी शो के एंकर के खिलाफ कार्रवाई की याद दिलाई जिन पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा था। महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा ‘इंडियाज मोस्ट वांटेड’ शो के एंकर रहे सुहैब इलियासी की ओर माना जा रहा है जिन पर मार्च 2000 में अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा था। हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2018 में इलियासी को बरी कर दिया था। मलिक ने ट्वीट किया, ‘‘यहां इंडियाज मोस्ट वांटेड का भाग-2 है। ऐसा ही कर रहा एक और एंकर अब आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।’’ 

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इस बीच महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार, कांग्रेस और उसके नेताओं के खिलाफ बोलने के लिए गोस्वामी की आवाज दबाने के मकसद से यह कार्रवाई की गयी है। पाटिल ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह लोकतंत्र और बोलने की आजादी पर हमला है। अर्नब गोस्वामी आपके (सरकार के), कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बोलते हैं। लेकिन इस आधार पर आप उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बंद हो चुके इस (खुदकुशी के लिए उकसाने के) मामले को फिर से खोलने का मतलब है कि गोस्वामी की आवाज को दबाने की कोशिश है। भाजपा और इस देश की जनता इसे सहन नहीं करेगी।’’ पाटिल ने कहा, ‘‘बोलने की आजादी पर लगाम कसने की इस तरह की कोशिशें आपातकाल के दौरान भी की गयी थीं और इंदिरा गांधी को आने वाले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।’’ उन्होंने कहा कि हम इस घटना की निंदा करते हैं और मेरे नेतृत्व में नागपुर में इसके खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा। महाराष्ट्र में अन्य स्थानों पर भी ऐसे प्रदर्शन होंगे।

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