By अशोक मधुप | Jun 21, 2021
कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए देश को तेजी से वैक्सीन लगाने के साथ-साथ देश में वैक्सीन के बारे में किये जा रहे दुष्प्रचार से भी लड़ना होगा। आने वाली कोरोना की तीसरी लहर को लेकर हम अभी से सचेत न हुए तो यह तय है कि तीसरी लहर दूसरी से भी ज्यादा भयावह और जानलेवा होगी। तीसरी लहर के प्रति केंद्र सरकार अभी से सचेत कर रही है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी ऐसा ही आदेश दिया है। महाराष्ट्र सरकार और उसके विशेषज्ञों ने कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर उनके यहाँ आ गई है। केंद्र सरकार के विशेषज्ञ अभी इसकी पुष्टि नहीं कर रहे। पर लॉकडाउन खुलने के बाद देश में जिस तरह से पब्लिक सड़कों पर निकली है, यह चिंताजनक है। इसके लिए हमें आत्म नियंत्रण करना होगा। विवाह और समारोह से कुछ समय बचना होगा। जरूरी होने पर ही घर से निकलना होगा। वैक्सीनेशन पर जोर देना होगा।
वैक्सीन के बारे में किए जा रहे दुष्प्रचार पर रोक लगाने के लिए भी काम करना होगा। पोलियो अभियान के दौरान भी ऐसे ही प्रचार किए गए थे। इसका परिणाम हुआ कि हमें पोलियों की समाप्ति के लक्ष्य को पाने में ज्यादा समय लगा।
कुछ देश और समाज विरोधी शक्तियां वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू होने के साथ ही सक्रिय हों गई थीं। कोई इसे भाजपाई वैक्सीन बता रहा है। कोई कह रहा है, ये वैक्सीन नहीं पानी है। कोई कोवैक्सीन को कोवीशील्ड से बढ़िया बता रहा है। अब नया प्रचार फैलाया जा रहा है कि वैक्सीन में गाय के बछड़े का खून मिला है। ये सब प्रचार और अफवाहें टीकाकरण को प्रभावित करने की योजना है। जिससे इन अफवाहों में आकर जनता वैक्सीन न लगवाए। तीसरी लहर में ज्यादा मौत हों और विरोधी लोग सरकार को बदनाम करने के अपने षड्यंत्र में कामयाब हो जाएँ। इन अफवाहों का रोकना अकेले सरकार के बस का नहीं है। पूरे समाज का दायित्व है कि वह आगे आए। अफवाहों को रोके। अफवाह फैलाने वालों को बेनकाब करे। लोगों को समझाए। अपने समाज में धर्मगुरुओं का बड़ा प्रभाव होता है, वे आगे आएं। उनके समझाने का अपने समाज में, समर्थकों में बड़ा असर होगा। यह युद्ध काल है। इसमें शांत और तटस्थ होकर नहीं रहा जा सकता। सबको आगे आना होगा। रामधारी सिंह दिनकर ने कहा है–
"समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध।
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।"
इस विपदाकाल में हम तटस्थ होकर न बैंठे। जो जितना कार्य कर सकता है करे। इस विपदा निवारण यज्ञ में सामर्थ्य के अनुसार आहुति दे। जनकल्याण कार्य करें।
-अशोक मधुप
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)