By अभिनय आकाश | Aug 08, 2026
नेपाल के अंदर इस वक्त जो भी हो रहा है उसने सबको चौंका दिया है क्योंकि इस बार नेपाल के अंदर आंदोलन देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए हो रहा है। नेपाल 240 साल तक हिंदू राष्ट्र रहा है। 2008 में राजतंत्र के अंत के साथ इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया था। अब फिर से इस विरासत को वापस बहाल करने के लिए नेपाल में नया आंदोलन खड़ा हो गया है। नेपाल में इसके लिए दम भर रहे प्रदर्शनकारी हिंसक होते जा रहे हैं और यह सब शुरू हुआ है हाल ही में कावड़ यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी के बाद। 26 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद नेपाल के हिंदू संगठन सड़कों पर आ चुके हैं और हिंसक विरोध प्रदर्शन के साथ सरकार पर हिंदू राष्ट्र बनाने का दबाव बना रहे हैं। नेपाल में इस वक्त हर शख्स की एक ही आवाज है कि नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करो। हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन पिछले दो दिनों में ज्यादा हिंसक हो चला है। सरकारी दफ्तरों में आग और वाहनों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हो चुकी है।
दरअसल आधिकारिक रूप से नेपाल सन 1768 से 2008 तक 240 साल हिंदू राष्ट्र था। 1768 में पृथ्वी नारायण शाह ने गोरखा साम्राज्य का विस्तार कर इसे हिंदू राष्ट्र घोषित किया। 1975 में राजा वीरेंद्र नेपाल को आधिकारिक रूप से हिंदू आधिराज्य दर्जा दिया। 2006 से 2008 तक जन आंदोलन और राजशाही के पतन के बाद अंतरिम संविधान पर बहस चली। मई 2008 में देश से राजतंत्र खत कर इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना दिया गया। लेकिन अब 18 साल बाद नेपाल में वही बहस फिर से छिड़ गई है। क्या नेपाल को हिंदू राष्ट्र फिर से घोषित किया जाना चाहिए? प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जेंजी आंदोलन के साथ उन्होंने नेपाल की पुरानी सरकार का विरोध इसी भरोसे के साथ किया था कि नई सरकार हिंदू राष्ट्र का अपना वादा पूरा करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री और पूरी कैबिनेट को डर है कि हिंदू राष्ट्र की मांग माने जाने के बाद संवैधानिक जटिलताएं और बढ़ जाएंगी।