By अंकित सिंह | Jul 29, 2026
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार, 29 जुलाई को पुलिस की ज्यादतियों को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बार-बार यह साफ़ किया गया कि कोई गोली नहीं चलाई गई; सिर्फ़ आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ऐसा आदेश देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होता है, मंत्री के पास नहीं। मंत्री ने लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026' पर चल रही चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई असंसदीय भाषा की भी कड़ी आलोचना की।
NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बाद पेश किए गए इस बिल को विपक्ष की तरफ़ से ज़ोरदार नारेबाज़ी के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार ने सोमवार को यह संशोधन बिल पेश किया था। यह कदम NEET विवाद को लेकर देशभर में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया, जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस प्रस्तावित कानून का मकसद 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट' में संशोधन करना है। इसके तहत परीक्षा का पेपर लीक करने में शामिल लोगों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है।
हाल ही में मंज़ूर हुए बिल में पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की गई है। इसमें गलत तरीकों में शामिल लोगों के लिए सज़ा को 2024 के एक्ट के तहत पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है, साथ ही 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। बिल में तीन महीने के अंदर मामलों को निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है। संगठित अपराधियों के लिए अधिकतम जुर्माना मौजूदा कानून के तहत तय सीमा से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।
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