By रेनू तिवारी | Jul 20, 2026
केंद्र सरकार ने सोमवार को शेयर बाजार के निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स को बड़ा झटका देते हुए लिस्टेड इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को हटाने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान में रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इस टैक्स को खत्म करने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की फिलहाल LTCG टैक्स को हटाने की कोई योजना नहीं है। भले ही बाजार के कुछ वर्गों और निवेशक संगठनों की ओर से बाजार में भरोसा बढ़ाने के लिए इसे हटाने की मांग लगातार की जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि टैक्स नीतियों और कैपिटल गेन्स टैक्स की दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, जो कि सालाना बजट प्रक्रिया के तहत व्यापक मैक्रो-इकोनॉमिक (समग्र आर्थिक) स्थितियों को ध्यान में रखकर तय होती है।
टैक्स कलेक्शन में 78% का भारी उछाल, सरकारी खजाने को बंपर कमाई
सरकार द्वारा इस टैक्स को न हटाने के पीछे सबसे बड़ा कारण इससे होने वाली बंपर कमाई है। संसद में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से होने वाला कलेक्शन पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये से लगभग 78% बढ़कर असेसमेंट ईयर 2025-26 में 1,29,158 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। सरकारी खजाने में इस टैक्स के बढ़ते योगदान को देखते हुए सरकार इसे छोड़ने के मूड में नहीं है।
यह स्पष्टीकरण निवेशकों और बाजार के भागीदारों की ओर से इस टैक्स को वापस लेने की बार-बार उठ रही मांगों के बीच आया है। कुछ लोगों का तर्क है कि यह टैक्स लॉन्ग-टर्म निवेश को हतोत्साहित करता है और टैक्स के बाद मिलने वाले रिटर्न को कम करता है। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने घरेलू निवेशकों और कुछ विदेशी निवेशकों के बीच समानता की मांग की है, खासकर सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए टैक्स छूट की घोषणा के बाद।
हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि ऐसे कदम की संभावना कम है, क्योंकि इक्विटी गेन्स से होने वाले टैक्स कलेक्शन में भारी बढ़ोतरी हुई है।
संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी ट्रांजेक्शन पर LTCG टैक्स से होने वाली आय पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये से बढ़कर असेसमेंट ईयर 2025-26 में लगभग 78% बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये हो गई है। इससे सरकारी खजाने में इस टैक्स के बढ़ते योगदान का पता चलता है।
अभी LTCG टैक्स क्या है?
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स तब होता है जब लिस्टेड शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड को एक साल से अधिक समय तक रखने के बाद बेचा जाता है।
मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत, एक फाइनेंशियल ईयर में 1.25 लाख रुपये से अधिक के गेन्स पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है, जबकि इस सीमा तक के गेन्स टैक्स-फ्री रहते हैं।
लिस्टेड इक्विटी पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर 20% की दर से टैक्स लगता है।
जुलाई 2024 के केंद्रीय बजट में घोषित बदलावों के बाद से ये दरें बदली नहीं हैं।
निवेशक बदलाव की उम्मीद क्यों कर रहे थे?
पिछले एक साल में यह मुद्दा कई बार उठा है, क्योंकि इक्विटी मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं और रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना था कि LTCG टैक्स की दर कम करने या छूट की सीमा बढ़ाने से लंबे समय के लिए निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है।
हालांकि, सरकार के रुख की वजह से ये उम्मीदें बार-बार कमज़ोर पड़ी हैं। पहले भी संसद में इस टैक्स को खत्म करने के बारे में सवाल उठाए गए हैं, और वित्त मंत्रालय ने हमेशा यही कहा है कि इस टैक्स को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
सोमवार को दी गई सफाई इसी बात को और पुख्ता करती है। सरकार का कहना है कि टैक्स पॉलिसी की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, लेकिन अभी ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वह इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स को खत्म करने की योजना बना रही है।