10 मिनट डिलीवरी पर सरकार की 'NO', Blinkit, Zomato को सख्त निर्देश, अब Safety First!

By अंकित सिंह | Jan 13, 2026

डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को लेकर केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट ने अपने सभी ब्रांड प्लेटफॉर्म से "10 मिनट में डिलीवरी" का दावा हटा दिया है। इस मुद्दे पर मांडविया ने ब्लिंकइट, ज़ेप्टो, स्विगी और ज़ोमैटो के अधिकारियों से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कंपनियों को डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा के हित में सख्त डिलीवरी समय सीमा को समाप्त करने की सलाह दी। मंत्री ने जोर दिया कि आक्रामक समयसीमा डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव डाल सकती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सभी कंपनियों ने सरकार को आश्वासन दिया कि वे अपने ब्रांड विज्ञापनों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी डिलीवरी समय संबंधी प्रतिबद्धताओं को हटा देंगे। इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करते हुए गिग वर्कर्स की भलाई और सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। यह घटनाक्रम त्वरित वाणिज्य मॉडलों और वितरण कर्मियों पर उनके प्रभाव की बढ़ती जांच के बीच आया है, जिसमें सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि तेज डिलीवरी के लिए श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें: Gig Workers का दर्द समझने सड़क पर उतरे AAP सांसद, Raghav Chadha बने Blinkit डिलीवरी बॉय | Video

यह कदम दिसंबर के अंत में विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर डिलीवरी कर्मचारियों द्वारा की गई हड़तालों के कुछ हफ्तों बाद आया है, जिसमें कामकाजी परिस्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सामाजिक सुरक्षा की कमी से संबंधित मुद्दों को उठाया गया था। सूत्रों के अनुसार, ब्लिंकइट अपने सभी ब्रांड संदेशों से "10 मिनट में डिलीवरी" का जिक्र हटा देगा। इसमें विज्ञापन, प्रचार अभियान और सोशल मीडिया संचार शामिल हैं।

इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि डिलीवरी में देरी होगी। इसके बजाय, सार्वजनिक संदेशों में निश्चित समय की प्रतिबद्धताओं पर जोर देने के बजाय, कंपनियां ऐसे वादों से बचने की कोशिश करेंगी जिन्हें असुरक्षित डिलीवरी व्यवहार को बढ़ावा देने वाला माना जा सकता है। विभिन्न शहरों में उपयोगकर्ताओं के अनुभवों से पता चलता है कि नए साल की पूर्व संध्या पर डिलीवरी काफी हद तक सामान्य रूप से जारी रही, लेकिन हड़तालों ने अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को फिर से हवा दे दी।

इससे पहले, ज़ोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल सहित प्लेटफॉर्म के संस्थापकों ने सार्वजनिक रूप से फास्ट डिलीवरी मॉडल का बचाव करते हुए कहा था कि ये मॉडल गति के बजाय सिस्टम डिज़ाइन पर आधारित हैं और डिलीवरी पार्टनर बीमित हैं। हालांकि, सरकार के हस्तक्षेप से यह संकेत मिलता है कि निश्चित डिलीवरी के वादों को लेकर जनता का रुख अब अधिक सतर्क हो रहा है।

प्रमुख खबरें

Iran संकट से भारत में गैस पर Panic, अचानक 20 लाख बढ़ी LPG Booking, सरकार ने दी बड़ी जानकारी

IPL 2026: KKR ने Blessing Muzarabani को किया टीम में शामिल, टी20 के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में है शुमार

IPL का जलवा! KKR के लिए Blessing Muzarabani ने ठुकराया PSL, पाकिस्तान में मचा हड़कंप

Dubai के आसमान में दिखा Iran का ड्रोन अटैक, Financial Centre पर मलबा गिरने से हड़कंप