Bangladesh की सरकार ने पार की हदें, हिंदुओं को खोज खोज कर जेल में डाल रही, अब लगने लगे काटने के नारे

By अभिनय आकाश | Dec 02, 2024

क्या बांग्लादेश में हिंदुओं को जीने का हक नहीं है। क्या वहां भारतीय संस्कृति और धर्म को अपराध माना जाता है। ये सवाल आज इसलिए फिर से उठ रहे हैं क्योंकि एक बार फिर  बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और एस्कॉन भक्तों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ जिसे सुनकर हर भारतीयों का खून खौल जाएगा। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले थामे नहीं थम रहे। राजधानी ढाका में एक बहुत बड़ी कट्टरपंथी यात्रा निकली है जिसमें एस्कॉन और हिंदुओं को अल्लाह-हू-अकबर के नाम के साथ काटने के नारे लग गए। साथ ही साथ एक नए नारे को बांग्लादेश की कट्टरपंथी रैलियों में सुना जा रहा है। ये दिल्ली नहीं ढाका है। यहां से निकल जाओ वरना अंजाम बहुत  बुरा होगा। 

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 बांग्लादेश की पुलिस ने क्यों रोका

वैध यात्रा दस्तावेजों के साथ भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) के दर्जनों सदस्यों को बांग्लादेश की आव्रजन पुलिस ने बेनापोल सीमा पर वापस भेज दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। बेनापोल आव्रजन पुलिस के प्रभारी अधिकारी इम्तियाज अहसानुल कादिर भुइयां के हवाले से कहा, हमने पुलिस की विशेष शाखा से परामर्श किया और उच्च अधिकारियों से निर्देश मिले कि उन्हें (सीमा पार करने की) अनुमति न दी जाए। विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं समेत 54 सदस्य शनिवार रात और रविवार सुबह जांच चौकी पर पहुंचे। हालांकि, अनुमति के लिए घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें बताया गया कि उनकी यात्रा अधिकृत नहीं है। इस्कॉन के एक सदस्य सौरभ तपंदर चेली ने कहा कि हम भारत में हो रहे एक धार्मिक समारोह में भाग लेने निकले थे, लेकिन आव्रजन अधिकारियों ने सरकारी अनुमति न होने का हवाला देते हुए हमें रोक दिया। 

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गिरफ्तारी को गलत तरीके से पेश किया

बांग्लादेश ने यूएन के अल्पसंख्यक मामलों के मंच को बताया कि ढाका में हिंदू नेता की गिरफ्तारी को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि इस गिरफ्तारी के पीछे खास आरोप है और इसे कोर्ट में निपटाया जा रहा है। बांग्लादेश के संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों में स्थायी प्रतिनिधि तारिक मोहम्मद आरिफुल इस्लाम ने कहा कि हमें यह देखकर बेहद दुख हुआ कि चिन्मय दास की गिरफ्तारी को कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया। 

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