By संतोष उत्सुक | Jan 24, 2026
एक बार मिली ज़िंदगी में भी इंसान काफी कुछ कर सकता है। नेता बन सकता है। सरकारी ठेकेदार भी बन सकता है। लेकिन बहुत और बड़ी कोशिशों के बिना सरकारी अफसर नहीं बन सकता। बहुत मेहनत का काम है सरकारी अफसर बनना और वो भी ऊंची कुर्सी वाला। खूब पढ़ना पड़ता है। एक बार मेहनत कर अफसर बन जाओ और मिल मिलाकर पोस्टिंग का जुगाड़ हो जाए तो ज़िंदगी वाह वाह करने लगती है। लोगों का नजरिया बदल जाता है जी। विशेषकर सुन्दर अविवाहित लड़कियों और उनके अभिभावकों का। वैसे तो आजकल लड़कियां अपना कैरियर बनाने में लगी रहती हैं, खाना पकाना सीखना तो छोड़ो, खाना खाने की सुध नहीं रहती।
इस सच को कई सरकारें समझती हैं, उन्हें पता है घर का खाना बढ़िया होता है। अफसरों को खाना तो अच्छा मिलना ही चाहिए इसलिए घर पर कुक भी सप्लाई किया जाता है। पत्नी की अफसरी भी खुश और बरकरार रहती है। अफसर तनाव रहित रहकर सरकार चलाने में उम्दा काम करते हैं लेकिन सभी को कुक नहीं मिलता तो पंगा होने लगता है। उनके यहां है तो हमारे यहां क्यूं नहीं। बस यहीं से जुगाड़ का पकना शुरू हो जाता है। छोटा अफसर बड़े को पटाता है और कुक रखने के लिए आउट सोर्सिंग शुरू हो सकती है। बेचारे सरकारी खजाने पर कुक भार भी बढ़ता जाता है। सरकारी अफसर क्या नहीं कर सकते, करते भी हैं, करवा भी सकते हैं। सालों साल कुक योजना पका सकते हैं। स्वादिष्ट शैली में सब पकाया और खाया जा रहा होता है लेकिन कहीं न कहीं से कमबख्त खुशबू लीक हो जाती है जो शिकायत करती है कि नियमों का मसाला प्रयोग नहीं किया गया।
भारी भरकम प्रशासन संभालने वालों को अच्छा खाना मिलना ही चाहिए। यह भी ज़रूरी तो नहीं कि उनकी पत्नी ही उनके लिए खाना बनाए। व्यावसायिक कुक बड़ा महत्त्वपूर्ण काम करता है। घर का खर्च बचाता है। सभी घर वालों के स्वाद का ख्याल रखता है। सब्जी खुद लाता है। वह एक विश्वसनीय व्यक्ति जो पूरे परिवार के लिए करता है, घरवाले एक दूसरे के लिए नहीं कर सकते। कुछ लोग नहीं चाहते कि सरकारी पारिवारिक काम सुचारु रूप से चले। वे चाहते हैं कि कुछ अफसरों को छोड़कर बाकी खुद ही खाना पकाएं या फिर..। सरकारी अफसर का कुक होना आसान नहीं।
- संतोष उत्सुक