By Ankit Jaiswal | Jul 05, 2026
सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी कथित सामग्री और भुगतान वाले विज्ञापनों के मामले में केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही ऐसी सभी आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाने और भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि यह कार्रवाई एक अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद की गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि मेटा की सिफारिश प्रणाली कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और सामग्री को बढ़ावा दे रही थी। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ भुगतान वाले विज्ञापन ऐसे शब्दों का उपयोग कर रहे थे, जो लोगों को एक संदेश साझा करने वाले दूसरे मंच पर ले जाते थे, जहां इस तरह की अवैध सामग्री कथित रूप से बेची जा रही थी।
सरकार ने अपने नोटिस में विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई है कि यदि किसी तकनीकी प्रणाली के कारण इस तरह की सामग्री अधिक लोगों तक पहुंच रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है। मंत्रालय ने मेटा से पूछा है कि आरोप सामने आने के बाद अब तक क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।
गौरतलब है कि सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो मेटा केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि सामग्री किसी तीसरे पक्ष ने डाली थी। विशेष रूप से यदि मामला भुगतान वाले विज्ञापनों का है, जिनसे मंच को आर्थिक लाभ मिलता है, तो संबंधित कंपनी की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यदि मेटा निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
उधर, मेटा की ओर से जारी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी किसी भी सामग्री या उसके प्रचार के प्रति कंपनी की शून्य सहनशीलता की नीति है। कंपनी का कहना है कि वह एआई आधारित उन्नत तकनीक की मदद से ऐसी सामग्री और उससे जुड़े खातों की पहचान कर उन्हें हटाने का लगातार प्रयास करती है।
मेटा के अनुसार, दुनिया भर में उसके अरबों यूजर्स हैं और अपराधी लगातार पहचान से बचने के नए तरीके अपनाते रहते हैं। इसी कारण विशेषज्ञों की टीमें सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रही हैं, नई तकनीक विकसित की जा रही है, आपत्तिजनक वेबसाइटों के संपर्क रोके जा रहे हैं और अन्य कंपनियों के साथ भी आवश्यक सूचनाएं साझा की जा रही हैं ताकि इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बता दें कि भारत का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बच्चों को यौन रूप से स्पष्ट सामग्री में दिखाने, उसका प्रकाशन करने या उसे डिजिटल माध्यम से प्रसारित करने पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है। इस अधिनियम की धारा 67बी विशेष रूप से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी डिजिटल सामग्री को अपराध की श्रेणी में रखती है। ऐसे में इस मामले की जांच और मेटा की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।