बांग्लादेशी घुसपैठियों पर ध्यान दे सरकार, यह लोग भी कोरोना फैला रहे हैं

By राजकुमार झाँझरी | Apr 20, 2020

दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में मार्च के महीने में संपन्न तब्लीगी जमात में शरीक होकर लौटे जमातियों द्वारा देश के 23 राज्यों में कोरोना संक्रमण फैलाये जाने की घटना से केंद्र सरकार ने अभी भी कोई सबक नहीं सीखा है तथा देश को 'कोरोना बम' सरीखी भयंकर आफत में डाल सकने वाले भारत के चप्पे-चप्पे पर मौजूद करोड़ों-करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों की गतिविधियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। सिंगापुर में कोरोना से पीड़ित रोगियों में आधे से ज्यादा बांग्लादेशी मजदूर पाये जाने के बाद सिंगापुर सरकार द्वारा इन मजदूरों को पूरी तरह क्वारेंटाईन में रखने की घटना भारत के लिए बड़ा सबक साबित हो सकती है।

कहने को तो बांग्लादेश सरकार ने समूचे देश में लॉकडाउन घोषित किया हुआ है, लेकिन देश में जारी अव्यवस्था के चलते लोग न सिर्फ सरकारी निषेधाज्ञा का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन कर रहे हैं, अपितु  सरकारी राहत सामग्री की भी सरे आम लूट-खसोट जारी है। दूसरी ओर दुकानें व रोजगार के साधन बंद होने के कारण भूख से पीड़ित लोग सड़कों पर उतर कर सरकार के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

गत 17 अप्रैल शुक्रवार को बांग्लादेश खिलाफत मजलिस के सीनियर नायब आमीर मौलाना जुबायेर अहमद अंसारी का सायं 6 बजे मार्कस पाड़ा स्थित आवास पर 59 वर्ष की उम्र में इंतकाल होने की खबर इलाके में आग की तरह फैल गई और शनिवार 18 अप्रैल को सुबह 10 बजे बांग्लादेश सरकार के लॉकडाउन को धत्ता बताते हुए जामिया रहमानिया बेड़तला मदरसे में उनके जनाजे में लगभग 1 लाख लोगों की भीड़ जुट गई। इलाके के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुसद राणा सहित कई पुलिस अधिकारियों द्वारा लोगों को समझाने की लाख कोशिशें करने के बावजूद कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा प्रदत्त राशन बीच में ही दलालों व सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं द्वारा हड़प लिये जाने से लोगों को भूख मिटाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है। गत शनिवार 18 अप्रैल को दोपहर सैंकड़ों लोगों ने ढाका-नारायणगंज लिंक सड़क पर धरना देकर घंटे भर के लिए यातायात ठप्प कर दिया। उनका कहना था कि सरकार ने तो लॉक डाउन कर दिया लेकिन हमारे पेट को कैसे लॉकडाउन करें ? सरकार पेट भरने की भी तो जुगत करे। सिलहट के विश्वनाथ उप-जिले में सरकारी लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए लोगों ने दुकानें व बाजार पूरी तरह खोल रखे हैं। इस बीच राजशाही के गोदागाड़ी में पीड़ित लोगों के बीच वितरण हेतु प्रदत्त 67 बोरे चावल हड़पने के आरोप में यूनियन अवामी लीग के सभापति अलालउद्दीन स्वपन को 18 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया। मणिरामपुर में एक धान मिल से 549 बोरे सरकारी चावल जब्त किये गये। शनिवार को ही गल्ला माल ले जा रहे एक ट्रक को रास्ते में ही रोक कर कुछ लोग सारा माल लूट कर ले गये। कुल मिलाकर पूरा बांग्लादेश कोरोना के आतंक से ज्यादा भूख व धर्मांधता के आतंक से त्रस्त होता जा रहा है।

सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं बांग्लादेशी मजदूर अब सिंगापुर सरकार के लिए भी सिरदर्द बन गये हैं तथा कोरोना को रोकने की सरकार की सारी कोशिशों को पलीता लगा रहे हैं। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सिंगापुर में 18 अप्रैल तक कुल 5992 कोरोना पीड़ितों की पहचान की गई है, जिनमें 4162 बांग्लादेशी मजदूर हैं। गत 18 अप्रैल को एक ही दिन में सिंगापुर में नये 942 कोरोना पीड़ितों की पहचान की गई, जोकि एक दिन में पाये गये सर्वाधिक कोरोना पीड़ितों का रेकॉर्ड है। इनमें बांग्लादेशी मजदूरों की संख्या 893 है, जो कुल कोरोना पीड़ितों का 95 % है। सबसे चिंता की बात तो यह है कि जहाँ अब तक समूचे बांग्लादेश में 2144 कोरोना मरीजों की शिनाख्त हुई है, वहीं सिंगापुर में 4162 बांग्लादेशी कोरोना पीड़ित पाये गये हैं, जो बांग्लादेश में कोरोना पीड़ितों की संख्या का लगभग दुगुना है। चिंता की बात यह है कि चंद हजार बांग्लादेशी मजदूर जहां सिंगापुर के लिए सिर दर्द बन गये हैं, वहीं करोड़ों-करोड़ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का बोझ ढोता भारत अब भी इस भयंकर खतरे को भांप नहीं पा रहा है।

सोचने की बात है कि जहाँ सिंगापुर से बांग्लादेश के बीच 2866 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद बांग्लादेशी मजदूर सिंगापुर सरकार के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं, वहीं बांग्लादेश और भारत की 4156 किलोमीटर सीमा आपस में जुड़ी होने तथा करोड़ों बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारत में मौजूद होने के बावजूद भारत सरकार बांग्लादेशी 'कोरोना बम' के खतरे के प्रति पूरी तरह आँखें मूंदे हुए है। बांग्लादेश की 262 किलोमीटर सीमा असम के साथ, 856 किलोमीटर सीमा त्रिपुरा के साथ, 180 किलोमीटर सीमा मिजोरम के साथ, 443 किलोमीटर सीमा मेघालय के साथ तथा 2217 किलोमीटर सीमा बंगाल से सटी हुई है। भारत-बांग्लादेश की सीमा पर कई स्थानों पर बाड़ न होने से रोज हजारों की संख्या में लोग न सिर्फ भारत की सीमा में अवैध रूप से प्रवेश करते हैं, अपितु काफी लोग तस्करी सहित विभिन्न गैर-कानूनी कार्यों में भी जड़ित रहते हैं। विशेषकर हर महीने हजारों की संख्या में गायों की तस्करी की घटनाएं रोजमर्रा की बात बन चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस के चलते उत्पन्न विपत्ति से मुकाबले हेतु जहाँ बांग्लादेश से सटी सीमाओं को तुरंत सील करना था, वहीं इस संदर्भ में कोई भी कदम न उठाने की वजह से इन सीमाओं से कभी भी कोरोना वायरस से ग्रसित लोगों के भारत की सीमाओं में प्रवेश की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। विशेषकर निजामुद्दीन मरकज में संपन्न तब्लीगी जमात की घटना के बावजूद केंद्र सरकार का बांग्लादेश के प्रति ढुलमुल रवैय्या देश के लिए काफी खतरनाक साबित होने के साथ ही सरकार की अब तक की सारी कोशिशों पर पानी फेर सकता है। साथ ही बांग्लादेशी घुसपैठियों के बोझ से बोझिल भारत के लिए कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन के चलते भूख से बिलबिलाते लाखों-करोड़ों बांग्लादेशी लोगों की भारत में घुसपैठ की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

-राजकुमार झाँझरी

संपादक, आगमन

गुवाहाटी (असम)

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