Book Review। रिपोर्टर ऑन द ग्राउंड: माइक पकड़ने से पहले कलम पकड़िए

By प्रियंका लोधी | Aug 18, 2025

पुस्तक ‘रिपोर्टर ऑन द ग्राउंड’ विशेष रूप से उन विद्यार्थियों एवं युवा पत्रकारों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जो पत्रकारिता में कदम रखना चाहते हैं, और जिन्हें टेलीविज़न में रिपोर्टर के रूप में करियर बनाना है या फिर जो सोशल मीडिया के माध्यम से ऑडियो-वीडियो पत्रकारिता में करियर बनाना चाहते हैं। पत्रकारिता में रुचि रखनेवाले युवा इससे जुड़ी बारीकियों और ‘ग्रामर’ को कहाँ से सीखे? इसी सवाल से जाने-माने रिपोर्टर और लेखक परिमल कुमार के रू-ब-रू होने का परिणाम है पुस्तक- ‘रिपोर्टर ऑन द ग्राउंड’। पत्रकारिता में कदम रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक पुस्तक है। पत्रकारिता के सैद्धांतिक पहलू पर कई किताबें आपको आसानी से मिल जाएँगी। लेकिन असली समस्या उसके व्यावहारिक पहलुओं से परिचित होने की है। यह पुस्तक पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्ष पर केंद्रित है। जिसे हम रिपोर्टिंग की प्रैक्टिस गाइड भी कह सकते हैं। लेखक परिमल कुमार ने बतौर रिपोर्टर करीब सत्रह वर्षों तक टीवी पत्रकारिता में कार्य किया है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने समृद्ध अनुभव को लिख दिया है। पुस्तक ‘रिपोर्टर ऑन द ग्राउंड’ की भाषा-शैली सरल है। 170 पृष्ठों की इस पुस्तक का प्रकाशन राधाकृष्ण पेपरबैक्स, नईदिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है। 

इसे भी पढ़ें: Book Review। पर्यटन को बढ़ावा देने वाली, रिसर्च स्कॉलर के लिए बहुउपयोगी पुस्तक

मोबाइल पत्रकारिता (मोजो) की शुरुआती चुनौतियों क्या होती हैं? मोजो के फायदे क्या हैं? इस पर भी पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गई है। कुल मिलाकर, यह पुस्तक उन सभी पहलुओं को छूने का प्रयास करती है, जो एक शुरुआती रिपोर्टर को परेशान करते हैं। कहावत है- “अंत भला तो सब भला”, लेकिन टीवी पत्रकारिता में शुरुआत का अपना एक अलग महत्व होता है। लेखक कहते हैं कि स्क्रिप्ट की शुरुआत हमेशा जोरदार होनी चाहिए। तभी दर्शक आपके समाचार से जुड़ा रहेगा। वे कहते है कि आमतौर पर स्क्रिप्ट को विजुअल शॉट्स के हिसाब से ही लिखना चाहिए, जिससे वॉइस ओवर में जो बोला जाए, आपका विजुअल उस पर फिट बैठे, सपोर्ट करे। स्लोगन, कोट्स और लोकोक्तियां के द्वारा हम छोटे वाक्यों के माध्यम से बड़ी बात कह जाते हैं। इसको भी लेखक ने उदाहरण से समझाने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि हेडिंग वही है, एक लाइन में पूरी कहानी कह दे। शीर्षक को समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि न्यूज़ रूम में रिपोर्टर से यह अपेक्षा की जाती है कि वह खबर को एक पंक्ति में बताए। लेखक का कहना है कि विद्यार्थियों को हमेशा यह कोशिश करनी चाहिए कि वे दिन की बड़ी ख़बर की हेडलाइन सोचें और लिखें और अगले दिन अलग-अलग अखबारों में देखें कि क्या उनकी सोच अख़बारों के सम्पादकों से मिलती-जुलती हैं। लगातार अभ्यास से एक समय ऐसा आएगा, जब विचार और प्रस्तुति में परिपक्वता आ जाएगी। 

- प्रियंका लोधी 

(समीक्षक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में पत्रकारिता की विद्यार्थी हैं।)

प्रमुख खबरें

El Clásico में Barcelona का दबदबा, Real Madrid को 2-0 से रौंदकर जीता La Liga खिताब

India में Grandmaster बनना क्यों हुआ इतना महंगा? Chess के लिए लाखों का कर्ज, बिक रहे घर-बार

Britain की पहली Sikh Rugby Player का नया दांव, अब Sumo रिंग में इतिहास रचने को तैयार

Global Tension के बीच SBI का दावा, पटरी से नहीं उतरेगी Indian Economy की रफ़्तार