प्रदूषण रोकने के लिए शानदार प्रयास (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | May 11, 2021

प्रदूषण रोकने के लिए बिना संकल्प और संस्था के कुछ भी ठोस नहीं हो सकता। नियम एवं कायदों के अनुसार आयोग गठित कर दिया जाए तो शुद्ध लाभ पहुंचाने वाली संस्था का उदय हो जाता है। जो संस्था बनने के बाद लाभ न दे उसका क्या फायदा, इसलिए संस्था का मूल उद्देश्य खूब लाभ पैदा करना होना चाहिए। किसी भी आयोग का गठन सुबह से देर रात तक बैठक कर सम्पन्न कर दिया जाए तो अगली सुबह आराम से उठ सकते हैं। यह सुबह जीवन की शानदार गैर प्रदूषित सुबह मानी जा सकती है क्यूंकि पिछली रात, ‘लाभ आयोग’ का गठन हो चुका होता  है। आयोग गठित होने की अगली सुबह प्रदूषण में कुछ कमी तो आ ही जाती है। आयोग के आदेश इतने सख्त होते हैं कि इंसान या संस्थान डरे न डरे लेकिन प्रदूषण डरना शुरू हो जाता है। खुशखबर यह है कि पिछली एक ही रात में बहुत बढ़िया आयोग का गठन कर दिया गया है। 

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पर्यावरणविद व पर्यावरण प्रेमियों को क़ानून व्यव्स्था का अता पता नहीं होता इसलिए उन्हें बाहर ही रखा जाएगा। आयोग में पूर्णकालिक सदस्य व समझदार प्रतिनिधि होने चाहिए, एक डेढ़ दर्जन उप समितियां व दो दर्जन मार्शल भी होने चाहिए जो प्रदूषण स्त्रोतों की निगरानी, पहचान, फैसले लागू करवाने व शोध विकास जैसे महत्वपूर्ण कार्य पहले से ज्यादा सक्रियता से करेंगे। इसके लिए उनको वातानुकूलित वाहन दिए जाएंगे और जो अपने क्षेत्र में सुबह शाम घोषणा करते रहेंगे कि हम प्रदूषण का मुकाबला, मिलकर, डटकर करेंगे। सबसे कहा जाएगा कि रोजाना कुछ कदम पैदल ज़रूर चला करें। संसाधनों को और ज़ोरदार ढंग से झोंकने को तैयार रखा जाएगा जिसके लिए महंगा ऐप बनवाया गया है। सम्बंधित विभागों को चौबीस घंटे हरकत में रखने की बात कही गई है। इस अभियान को अब एक नई लड़ाई की तरह लिया जाएगा। तन, मन और धन के माध्यम से यह सुनिश्चित कर लिया गया है कि संस्था में प्रदूषण जैसे महत्वपूर्ण मामले पर घटिया राजनीति बिलकुल नहीं की जाएगी। कार्यालय सौ प्रतिशत डिजिटल होगा जिसमें अत्याधुनिक संयंत्रों का प्रयोग होगा, कागज़ प्रयोग नहीं किया जाएगा। खान पान में सिर्फ आर्गेनिक वस्तुएं ही प्रयोग की जाएंगी। प्लास्टिक का फर्नीचर या फूल पौधे नहीं रखे जाएंगे। फर्नीचर शीशम की लकड़ी का बनवाया जाएगा । इस परिसर के अडोस पडोस में आधा दर्जन झरने भी बनवाए जाएंगे ताकि सभी निर्णय कुदरती वातावरण में लिए जा सकें।

ऐसा लगता है आयोग गठन बारे जानकर प्रदूषण स्वयं डर गया है, उसे लगने लगा है कि अब उसके बुरे दिन शुरू हो गए हैं।   

- संतोष उत्सुक

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