सिविल सेवक बनने के लालच का देश के लिए जरूरी अन्य पेशों पर प्रतिकूल प्रभाव: संसदीय समिति

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 03, 2023

संसद की एक समिति ने बृहस्पतिवार को कहा कि सिविल सेवाओं में 70 प्रतिशत से अधिक भर्तियां तकनीकी विषयों से होती हैं और सिविल सेवक बनने का लालच संभवत: उन अन्य पेशों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है जो देश के लिए जरूरी हैं। विभाग से संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी संसद की स्थायी समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि सिविल सेवाओं के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का यह सही समय है। समिति ने कहा कि एक सिविल सेवक सरकार और आम लोगों के बीच एक कड़ी होता है और वह जमीनी स्तर पर काम करता है, जिसके लिए काफी मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। समिति ने यह भी कहा कि एक सिविल सेवक को इस तरह से प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वह किसी भी मुद्दे के प्रति अधिक मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करे।

समिति ने कहा कि यूपीएससी और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) प्रत्येक वर्ष विभिन्न परीक्षाएं आयोजित करते हैं और विभिन्न पदों पर अनुशंसित अभ्यर्थी प्रदान करते हैं। इसने कहा कि उदाहरण के लिए, सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से, यूपीएससी हर साल लगभग 1,000 अभ्यर्थियों का चयन करता है और इन अभ्यर्थियों को 19 विभिन्न सेवाओं में तैनात किया जाता है। पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए इसमें कहा गया कि सिविल सेवा परीक्षा-2020 के माध्यम से चुने गए 833 अभ्यर्थियों में से 541 अभ्यर्थी (65 प्रतिशत) इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि, 33 (चार प्रतिशत) चिकित्सा पृष्ठभूमि, 193 (23 प्रतिशत) मानविकी पृष्ठभूमि और 66 (आठ प्रतिशत) अन्य पृष्ठभूमि वाले थे। सिविल सेवा परीक्षा-2019 के माध्यम से चुने गए 922 अभ्यथिर्यों में से 582 (63 प्रतिशत) इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि, 56 (छह प्रतिशत) चिकित्सा पृष्ठभूमि, 223 (25 प्रतिशत) मानविकी पृष्ठभूमि और 61 (छह प्रतिशत) अन्य पृष्ठभूमि वाले थे। समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या यूपीएससी परीक्षा चक्र की अवधि को कम करने के लिए सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न में कोई बदलाव करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि यूपीएससी द्वारा आयोजित प्रत्येक भर्ती परीक्षा को पूरा होने में छह महीने से एक साल तक का समय लगता है।

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