By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 08, 2026
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर जीएसटी परिषद ने बृहस्पतिवार को व्यापक सुधारों की दिशा में कदम उठाया। इसके तहत कर अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करने और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी गयी। इसके साथ ही करदाताओं के लिए तेजी से और बड़े पैमाने पर स्वचालित रिफंड की व्यवस्था शुरू करने का भी फैसला किया गया।
इसके अलावा कोई अन्य कार्रवाई नहीं होगी। सीतारमण ने कहा कि परिषद ने एक अन्य महत्वपूर्ण सिफारिश के तहत उलट शुल्क ढांचे के तहत रिफंड का लाभ इनपुट (कच्चे माल) सेवाओं तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह बदलाव एक नवंबर, 2026 या उसके बाद लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट पर लागू होगा।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई राज्यों में पंजीकृत केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) करदाताओं के लिए ‘फेसलेस’ यानी करदाताओं और अधिकारियों के आमने-सामने आये बिना कर आकलन की व्यवस्था शुरू करने की योजना है। सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म कर दी जाएगी और अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही 10,000 रुपये से कम की राशि वाले मामलों में कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
सीतारमण की अध्यक्षता और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली परिषद ने न्यूनतम सजा को भी खत्म करने की सिफारिश की है। साथ ही मामले में जुर्माना, कारावास या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर छोड़ दिया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जहां कोई विशेष जुर्माना निर्धारित नहीं है, वहां लागू होने वाले सामान्य जुर्माने को भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बैठक में जीएसटी की किसी भी दर में बदलाव नहीं किया गया है। परिषद की सिफारिशें एक अप्रैल से प्रभावी होंगी। एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने मुख्य रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी विसंगतियों को दूर कर लिया है और उलट शुल्क ढांचे की समस्या का समाधान कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे नहीं लगता कि अब कारोबार सुगमता या विसंगतियों और दरों के लिहाज से बुनियादी मुद्दे लंबित हैं। आप कह सकते हैं कि चाहे वे दर से जुड़े हों या प्रक्रिया से, अगली पीढ़ी के जीएसटी के 99 प्रतिशत मुद्दों का समाधान हो चुका है।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधार की प्रक्रिया भरोसे के सिद्धांत पर आधारित रही है। उन्होंने कहा, ‘‘कारोबारियों पर भरोसा करना होगा।
करदाताओं पर भरोसा करना होगा। और अगर कंपनियां आपस में विश्वास के साथ काम करती हैं, तो हमें जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।