By रितिका कमठान | Jun 13, 2024
केंद्र में नई सरकार बन चुकी है। नई सरकार के गठन के बाद 22 जून को जीएसटी काउंसिल की बैठक होने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में ये 53वीं बैठक होने वाली है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 53वीं बैठक 22 जून को नई दिल्ली में होगी। जीएसटी की इस बैठक में काफी अहम फैसले हो सकते है।
जीएसटी बैठक के संबंध में जीएसटी परिषद सचिवालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा,‘‘जीएसटी परिषद की 53वीं बैठक 22 जून 2024 को नई दिल्ली में होगी।’’ बैठक के एजेंडे की जानकारी अभी परिषद के सदस्यों को नहीं दी गई है। लोकसभा चुनाव के बाद यह परिषद की पहली बैठक होगी। जीएसटी परिषद की 52वीं बैठक सात अक्टूबर 2023 को हुई थी, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री शामिल हुए थे।
यह घटनाक्रम केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मोदी सरकार 3.0 में मंत्रालय का कार्यभार संभालने के एक दिन बाद और जुलाई में अपेक्षित केंद्रीय बजट से पहले नॉर्थ ब्लॉक के नियमित क्वारंटीन पर जाने से कुछ घंटे पहले हुआ। एक अधिकारी का कहना है कि जीएसटी परिषद अप्रत्यक्ष करों से संबंधित मामलों पर विचार करेगी। राज्यों के वित्त मंत्रियों की उपस्थिति से केंद्र को बजट पर सुझाव लेगी।
अधिकारी ने बताया कि निर्मला सीतारमण लगभग जुलाई के तीसरे सप्ताह में संसद में केंद्रीय बजट पेश करेंगी। “अगली जीएसटी परिषद की बैठक एक महत्वपूर्ण अंतराल के बाद पहली बार हो रही है और इसमें दरों को युक्तिसंगत बनाने पर बहुप्रतीक्षित चर्चा की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, प्राकृतिक गैस जैसे कम प्रभाव वाले पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में शामिल करने का प्रारंभिक प्रयास कारोबार के लिए अत्यधिक लाभकारी होगा।'' डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा है।
मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह में आई स्थिरता तथा जीएसटी में होने वाले परिवर्तन केंद्रीय बजट प्रस्तावों से बाहर हैं, जिससे जीएसटी परिषद को विभिन्न मुद्दों पर विचार करने में प्रोत्साहन मिलेगा। लॉ फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर रजत बोस के अनुसार, नई एनडीए सरकार की पहली जीएसटी परिषद बैठक के पास एजेंडा की पूरी व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग पर कराधान और अक्टूबर 2023 में पेश किए गए मूल्यांकन नियमों की वादा की गई समीक्षा जैसे प्रमुख उद्योग मुद्दों को संबोधित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "कुछ मदों में केंद्रीय बजट 2024-25 पर राज्य के वित्त मंत्रियों से चर्चा और फीडबैक तथा नई सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली अन्य प्रमुख नीतिगत पहल शामिल हैं।"
उन्होंने कहा कि अन्य एजेंडा मदों में कपड़ा और उर्वरक जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए उलटे शुल्क ढांचे (आईडीएस) पर चर्चा और भारत में आम जनता द्वारा उपयोग की जाने वाली कुछ वस्तुओं पर जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाना शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी संग्रह में स्थिरता आने तथा केंद्रीय बजट के बाहर भी बदलाव करने की सुविधा मिलने से परिषद के पास उद्योग की चिंताओं को प्रभावी ढंग से दूर करने का एक आदर्श अवसर है।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर महेश जयसिंह ने कहा, "संबंधित पक्ष के मुफ्त लेनदेन और ईएसओपी कराधान जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर अपेक्षित स्पष्टीकरण भी नीति निर्माताओं द्वारा उद्योग के हितधारकों के साथ जुड़ने और फीडबैक के आधार पर प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों का संकेत है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रारंभिक वर्षों के ऑडिट के समापन के बाद विवादों में वृद्धि के साथ, उद्योग के भीतर पूर्व-जमा प्रतिशत की समीक्षा के लिए आशा है ताकि उन्हें पूर्ववर्ती सेवा कर व्यवस्था के अनुरूप बनाया जा सके।" इसके अतिरिक्त, इन प्रारंभिक वर्षों के विवादों को सुलझाने के लिए एक माफी योजना के प्रति आशावाद है, जिससे लंबे समय तक चलने वाले मुकदमेबाजी से बचने में मदद मिलेगी।”