By नीरज कुमार दुबे | Nov 17, 2022
नमस्कार, प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास चुनावी कार्यक्रम कौन बनेगा गुजरातना सरदार में आप सभी का स्वागत है। गुजरात में 27 साल से सत्ता में मौजूद भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकने जा रही है। इस क्रम में भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की जनसभाएं कराने की योजना बनाई है। दूसरी ओर राज्य में नामांकन दाखिल करने और विधानसभा सीटों पर चुनाव प्रचार का काम भी जारी है। उम्मीदवार जनता का समर्थन हासिल करने के लिए नये नये तरीके इजाद कर रहे हैं। वहीं असद्दुदीन ओवैसी अपना पुराना राग हर जगह अलापते फिर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा 1995 से लगातार छह विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुकी है। पार्टी इस राज्य में जीत के सिलसिले को बनाए रखना चाहती है। आम तौर पर गुजरात में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता आया है लेकिन इस इस बार आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंककर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
दूसरी ओर, गुजरात चुनाव में विभिन्न सीटों पर नजर डालें तो कांग्रेस नेता परेश धनाणी के लिए चौथी बार अमरेली सीट पर जीत हासिल करना इस बार खासकर ऐसी स्थिति में आसान नहीं होगा, जब पाटीदार आरक्षण को लेकर आंदोलन फीका पड़ गया है। इस सीट पर आम आदमी पार्टी कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रही है। भाजपा ने इस सीट से अपनी जिला इकाई प्रमुख कौशिक वेकारिया को मैदान में उतारा है, जबकि आप ने रवि धनाणी को टिकट दिया है। इन तीनों दलों के उम्मीदवार पाटीदार समुदाय से संबंध रखते हैं। गौरतलब है कि इस विधानसभा क्षेत्र में आधे से अधिक मतदाता पाटीदार हैं। अमरेली में प्रवेश करते ही हर प्रमुख मार्ग पर परेश के होर्डिंग देखे जा सकते हैं, जिनमें यह बताया गया है कि उन्होंने इस क्षेत्र के लिए कितना काम किया है। परेश धनाणी ने 2002 में इस सीट पर चुनाव जीता था, तब वह मात्र 26 साल के थे, लेकिन 2007 में उन्हें भाजपा के दिलीप संघानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वह 2012 फिर से इस सीट से जीते और उन्होंने 2017 में इस क्षेत्र पर जीत बरकरार रखी। इस बार देखना होगा कि क्या वह फिर से जीतते हैं या किसी अन्य को मौका मिलता है।
वहीं अगर वडोदरा के सावली विधानसभा क्षेत्र आपको लिये चलें तो यहां भाजपा उम्मीदवार केतन ईनामदार रईस होने के बावजूद लोगों के आगे झोली फैला कर पैसे और समर्थन मांग रहे हैं। इस बारे में उनका कहना है कि मैं चाहता था कि जनता के पैसे से ही नामांकन की राशि जमा करूं और चुनाव लड़ूँ।
दूसरी ओर एआईएमआईएम प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी भी चुनाव प्रचार गर्माये हुए हैं। वह अपनी अधिकतर सभाओं में युवाओं पर ही फोकस कर रहे हैं और कह रहे हैं कि हम हैदराबाद से यहां इसलिए आये हैं ताकि गुजरात की अवाम को लीडर बना सकें।