By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली वितरण कंपनी को मंजूरी देने के विरोध में शुरू हुई बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हालांकि, राज्य के बिजली मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया है और कुछ घंटे में हड़ताल समाप्त हो जाने की उम्मीद है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है।
इस संदर्भ में पूछे जाने पर हरियाणा के बिजली मंत्री विज ने पंचकूला में संवाददाताओं से कहा कि सरकार सभी विकल्पों पर बातचीत करने के लिए तैयार है। इसमें बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत कार्रवाई करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा लगभग सुलझ गया है।
मैं पहले दिन से ही कर्मचारी संगठनों के नेताओं से कह रहा हूं कि हड़ताल इस समस्या का समाधान नहीं है। आज भी मैंने उनसे बात की है और सरकार के साथ बातचीत करने को कहा है।” विज ने कहा कि कर्मचारियों की ओर से एचईआरसी के आदेश को रद्द करने के लिए बिजली अधिनियम की धारा 108 का इस्तेमाल करने की मांग आई थी। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी बात की है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि हड़ताल कुछ घंटे में समाप्त हो जाएगी। मुख्यमंत्री सैनी और विज ने बुधवार को कहा था कि राज्य सरकार एचईआरसी के आदेश के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के समक्ष कर्मचारियों का पक्ष मजबूती से रखेगी। इस हड़ताल के कारण राज्य के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।
गुरुग्राम के कई इलाकों में 30 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं आने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली संकट से परेशान लोगों ने कुछ इलाकों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और रास्ते बाधित कर दिए। बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर पानी की उपलब्धता पर भी पड़ा।
बिजली नहीं होने से जल आपूर्ति के लिए लगे पंप और बूस्टिंग स्टेशन प्रभावित हुए। कई आवासीय इलाकों में इन्वर्टर और बिजली के वैकल्पिक इंतजाम भी कुछ घंटे में जवाब दे गए। हड़ताल का असर औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ा।
गुरुग्राम के सेक्टर-37, बसई, कादीपुर, उद्योग विहार और बेगमपुर खटोला सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों का उत्पादन प्रभावित होने की खबर है। बिजली कर्मचारियों ने निजी कंपनी को वितरण की जिम्मेदारी सौंपे जाने का विरोध करते हुए आशंका जताई है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किसानों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए बिजली महंगी हो सकती है।