Yes Milord: यूपीएससी की याचिका पर पूजा खेडकर से जवाब, व्यास तहखाने की छत पर नमाज रहेगी जारी, जानें कोर्ट में इस हफ्ते क्या हुआ?

By अभिनय आकाश | Sep 14, 2024

यूपीएससी की याचिका पर पूजा खेडकर से हाई कोर्ट ने मांगा जवाब। कोचिंग सेंटर में मौतों के मामले में दिल्ली HC ने CBI से जलभराव का कारण बताने को कहा। गांधी मैदान विस्फोट केस में 4 दोषियों की मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील। केजरीवाल 177 दिन बाद जेल से बाहर,  शराब नीति से जुड़े CBI केस में सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत। व्यासजी के तहखाने की छत पर नमाज रोकने से कोर्ट का इनकार। इस सप्ताह यानी 09 सितंबर से 14 सितंबर 2024 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे। 

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यूपीएससी की याचिका पर पूजा खेडकर से जवाब

 दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व परिवीक्षाधीन अधिकारी पूजा खेडकर से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें अदालत में कथित रूप से झूठा बयान और हलफनामा देने के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने यूपीएससी की अर्जी पर खेडकर को नोटिस जारी किया और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर के लिए तय की। यूपीएससी ने दलील दी कि 31 जुलाई को जिस आदेश के जरिए खेडकर की उम्मीदवारी रद्द की गई थी, उसी दिन उन्हें उनके पंजीकृत ईमेल आईडी पर इस बाबत सूचित किया गया था। 

हाई कोर्ट ने सीबीआई से सीबीआई से जलभराव का कारण बताने को कहा 

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से पूछा कि 27 जुलाई को ‘ओल्ड राजेंद्र नगर’ में भारी जलभराव का क्या कारण था, जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन विद्यार्थियों की एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में डूबने से मौत हो गई। बेसमेंट के सह-मालिकों- परविंदर सिंह, तजिंदर सिंह, हरविंदर सिंह और सरबजीत सिंह-ने पिछले महीने इस आधार पर जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था कि वे केवल उस बेसमेंट के मालिक हैं, जिसे कोचिंग सेंटर को किराये पर दिया गया था और इसलिए, दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने जेल में बंद बेसमेंट के सह-मालिकों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पूछा कि उस दिन (भारी जलभराव का) क्या कारण था? दिल्ली में भारी बारिश हुई। उस दिन इतना जलभराव क्यों था? क्या यह बारिश की वजह से था या कुछ और वजह रही। पीठ ने जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

 गांधी मैदान बम ब्लास्ट मामले में पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

पटना हाई कोर्ट ने वर्ष 2013 के सिलसिलेवार विस्फोट मामले में चार दोषियों की मृत्युदंड की सजा को 30 वर्ष के कारावास में बदल दिया। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली के दौरान गांधी मैदान में विस्फोट हुए थे। न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार और जितेंद्र कुमार की खंडपीठ ने राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत द्वारा दो अन्य दोषियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। अक्टूबर, 2021 में एनआईए की विशेष अदालत ने इस मामले में कुल नौ लोगों को दोषी ठहराया था, जिनमें से चार को मृत्युदंड, दो को आजीवन कारावास और दो को 10 साल की कैद और एक को सात साल की जेल की सजा और एक अन्य को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी जबकि एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। 

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व्यास तहखाने की छत पर जारी रहेगी नमाज़: कोर्ट

ज्ञानवापी मस्जिद के व्यास तहखाने की मरम्मत कराने और तहखाने की छत पर नमाजियों के प्रवेश पर रोक की मांग वाली हिंदू पक्ष की याचिका खारिज कर दी गई। वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) हितेश अग्रवाल की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यास तहखाने में चल रही पूजा और तहखाने की छत पर नमाज जारी रहेगी। यह याचिका नंदीजी विराजमान की ओर से लखनऊ जन उ‌द्घोष सेवा संस्था की सदस्य आकांक्षा तिवारी और अन्य की ओर से दाखिल की गई थी। हिंदू पक्ष की दलील थी कि व्यास तहखाना बहुत पुराना होने से इसके पिलर कमजोर हैं। 

केजरीवाल को बेल, सीबीआई को तोते वाला तंज

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति से जुड़े सीबीआई केस में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को को जमानत दे दी। अदालत ने कहा है कि केजरीवाल को हिरासत में रखना उन्हें स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करने जैसा होगा। सीबीआई को निश्चित ही पिंजरे के तोते वाली धारणा से खुद को दूर करना होगा। उसे दिखाना चाहिए कि वह पिंजरे का तोता नहीं है। केजरीवाल को पहले ईडी ने आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें 2 जून को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई थी। उन्हें सीबीआई ने करप्शन केस में जेल से ही गिरफ्तार किया था। शीर्ष अदालत ने इस मामले में जमानत देते हुए वही शर्ते लगाई हैं, जो ईडी केस में लगाई गई थी।


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