सेंसरशिप, मार्शल लॉ नहीं लगा सकते, केजरीवाल की गिरफ्तारी वाली खबरों के मीडिया कवरेज पर रोक की मांग वाली याचिका पर HC की फटकार

By अभिनय आकाश | May 08, 2024

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मीडिया को सेंसर करने या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनुचित प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि इसने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी या उनके इस्तीफे की अटकलों के बारे में सनसनीखेज सुर्खियां प्रसारित करने से समाचार चैनलों को रोकने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने याचिकाकर्ता के रूप में पेश हुए वकील श्रीकांत प्रसाद को संबोधित करते हुए कि क्या आपको लगता है कि अदालतें अनुच्छेद 226 के तहत सेंसरशिप लगाती हैं? आप प्रेस पर प्रतिबंध लगाने का आदेश मांग रहे हैं? क्या हम सेंसरशिप? मार्शल लॉ, आपातकाल लगाते हैं? 

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प्रसाद ने तर्क दिया कि मीडिया कवरेज और केजरीवाल के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा के नेतृत्व में सुनियोजित राजनीतिक विरोध मौलिक अधिकारों का अत्यधिक उल्लंघन था। उन्होंने सचदेवा को राजनीतिक विरोध या बयानों के माध्यम से केजरीवाल पर इस्तीफा देने के लिए अनुचित दबाव डालने से रोकने की मांग की। अतिरिक्त सॉलिसिटर-जनरल चेतन शर्मा द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए केंद्र ने याचिका का विरोध करते हुए सुझाव दिया कि प्रसाद ने इसे गुप्त उद्देश्यों के लिए दायर किया है क्योंकि वह झारखंड के स्थायी निवासी हैं।

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न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि अदालत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को रैलियां आयोजित करने या केजरीवाल के इस्तीफे की मांग करने वाले बयान देने से रोकने जैसे आपातकालीन उपाय लागू नहीं कर सकती। इसने केजरीवाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से शासन करने की अनुमति देने के प्रसाद के अनुरोध को भी खारिज कर दिया। 

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