Chandipura Virus रोकेगा केंद्रीय एक्सपर्ट दल, गुजरात और राजस्थान में तैनाती

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 05, 2026

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुजरात और राजस्थान में जारी चांदीपुरा वायरस रोग (सीएचपीवी) के प्रकोप से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (एनजॉर्ट) तैनात किया है। मंत्रालय ने कहा कि यह तैनाती शोध संस्थानों के राष्ट्रव्यापी नेटवर्क द्वारा की जा रही निरंतर और गहन वैज्ञानिक जांच के साथ-साथ राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा राज्य निगरानी इकाइयों के सहयोग से चलाए जा रहे एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) के तहत बीमारी की लगातार की जा रही निगरानी के बीच की गई है। इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य वायरस के फैलने के तरीके, इसके नैदानिक दायरे, महामारी विज्ञान और संभावित उपचार दृष्टिकोणों की समझ को आगे बढ़ाना है, ताकि साक्ष्यों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य कदमों को सही दिशा दी जा सके।

इसे भी पढ़ें: Gujarat CM भूपेंद्र पटेल को सौंपा गया Commonwealth Games ध्वज, 2030 की तैयारियां शुरू

यह टीम जमीनी प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभागों के साथ मिलकर काम करेगी और अपना जमीनी मूल्यांकन पूरा करने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह तैनाती हाल के वर्षों में चांदीपुरा वायरस के लिए की जा रही सबसे व्यापक वैज्ञानिक जांचों के बीच हुई है। इस प्रकोप की जांच के लिए आईसीएमआर-राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (चेन्नई), आईसीएमआर-राष्ट्रीय वेक्टर नियंत्रण अनुसंधान संस्थान (पुडुचेरी), आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (पुणे), आईसीएमआर-राष्ट्रीय पूर्व-नैदानिक अनुसंधान संस्थान (हैदराबाद) और आईसीएआर-राष्ट्रीय पशु रोग महामारी विज्ञान एवं सूचना विज्ञान संस्थान (बेंगलुरु) के विशेषज्ञ गुजरात राज्य स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

इसे भी पढ़ें: Gujarat Govt की Career Guide: 'गुजरात पाक्षिक' और 'रोजगार समाचार' अब Online Subscription के साथ उपलब्ध

बयान में कहा गया है कि इसके तहत महामारी विज्ञान, विषाणु विज्ञान, एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान), पशु चिकित्सा विज्ञान और प्रयोगशाला निदान के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया है, ताकि चांदीपुरा वायरस संक्रमण के हल्के बुखार से लेकर एक्यूट एंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस (मस्तिष्क की गंभीर सूजन या दिमागी बुखार) तक के सभी लक्षणों को समझा जा सके और जनस्वास्थ्य उपायों को मजबूत करने के लिए साक्ष्य जुटाए जा सकें। जांच के तहत, प्रभावित जिलों में एक्यूट फेब्राइल इलनेस यानी एएफआई (अचानक आने वाला तेज बुखार) और एईएस (दिमागी बुखार) के लक्षणों वाले मरीजों में सक्रिय निगरानी तेज कर दी गई है। इसके साथ ही, बिना लक्षण वाले संक्रमणों का अनुमान लगाने और वायरस के प्रसार की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए समुदाय आधारित सीरोसर्वे (रक्त नमूनों की जांच) कराये जा रहे हैं।

प्रयोगशाला की टीमें बीमारी के विकास और उसके कारणों को बेहतर ढंग से समझने के लिए नैदानिक परीक्षणों को मजबूत करने और बेहतर पशु मॉडल विकसित करने पर एक साथ काम कर रही हैं। जांच के जरिये मुख्यतया वायरस के फैलने के तरीके का पता लगाया जा रहा है। यद्यपि रेत मक्खी चांदीपुरा वायरस की स्थापित वाहक है, लेकिन वैज्ञानिक इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या मच्छर, चिचड़ी (टिक्स) और घुन (माइट्स) जैसे अन्य कीटों की भी इसके प्रसार में कोई भूमिका हो सकती है।

इसे भी पढ़ें: Jaipur : करणी सेना के Protest में एक प्रदर्शनकारी की मौत , UGC Regulation 2026 को लेकर हो रहा था भारी विरोध

प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी संख्या में एकत्र किए गए कीट-पतंगों के नमूनों का वर्तमान में प्रयोगशाला में विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि जब तक वैज्ञानिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान प्रकोप के लिए जिम्मेदार वाहक (कीट) की पहचान करना जल्दबाजी होगी।

प्रमुख खबरें

Jharkhand JPSC Protest: सरकार से बातचीत को तैयार छात्र, Video Recording की रखी शर्त

Hiroshima Day 2026: क्यों मनाया जाता है हिरोशिमा डे? जानिए परमाणु हमले की पूरी कहानी

Nitin Gadkari on E20 Petrol: पुरानी गाड़ियों के लिए भी सुरक्षित है इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल, घबराने की जरूरत नहीं

Sheikh Hasina Speech | देश से दूर, लेकिन अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई हूं...फफक कर रोती हुई बोलीं शेख हसीना