Yes Milord: महिलाओं के हक में SC की शानदार पहल, अनुच्छेद 370 परमानेंट या हटाने का फैसला वैध? कोर्ट में इस हफ्ते क्या कुछ हुआ

By अभिनय आकाश | Aug 18, 2023

सुप्रीम कोर्ट से लेकर लोअर कोर्ट तक के वीकली राउंड अप में इस सप्ताह कानूनी खबरों के लिहाज से काफी उथल-पुथल वाला रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास 10 दिनों तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। कोर्ट में महिलाओं के लिए कई शब्दों का इस्तेमाल नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के लिए शब्दावली जारी की है। बिलकिस बानो केस में गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने आड़े हाथों लिया है। इस सप्ताह यानी 14 अगस्त से 18 अगस्त 2023 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे।

छेड़छाड़, वेश्या और हाउसवाइफ जैसे शब्द जल्द ही कानूनी शब्दावली से बाहर हो सकते हैं। छेड़छाड़ की जगह सड़क पर यौन उत्पीड़न, वेश्या की जगह सेक्स वर्कर हाउसवाइफ की जगह होममेकर जैसे शब्द ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक हैंडबुक जारी की, जिसमें अनुचित लैंगिक शब्दों की लिस्ट है। इन की जगह वैकल्पिक शब्द सुझाए गए हैं। हैंडबुक के मुताबिक, पुरुषों का ये तर्क गलत है कि कोई महिला गैर परंपरागत कपड़े पहनती है या अल्कोहल / सिगरेट का सेवन करती है, तो वह उन्हें इनवाइट कर रही हैं। महिला सिगरेट या अल्कोहल लेती है तो उसके कई कारण हो सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि उसकी मर्जी के बिना कोई उसे टच करे। 

जन्मभूमिः निर्माण ढहाने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के पास कथित अवैध निर्माण ढहाने के रेलवे के अभियान पर दस दिन की रोक लगा दी। पीठ ने केंद्र और अन्य को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता याकूब शाह की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि सौ मकान गिरा दिए गए हैं। पीठ ने कहा, आप इलाहाबाद हाई कोर्ट जा सकते है।  अगले 10 दिनों तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया है. रेलवे और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया गया है। इससे पहले, श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट ने मथुरा श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पड़ोसी शाही ईदगाह मस्जिद के परिसर के सर्वेक्षण के अपने अनुरोध को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा खारिज करने के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। 

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तो संसद कानून नहीं बना सकती ?

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विवाद चार साल बाद भी नहीं थमा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट के सामने जम्मू कश्मीर के इतिहास के पन्ने पलटे जा रहे हैं। आर्टिकल 370 पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि 370 को प्रेजिडेंट रूल से खत्म किया जाता है तो इसका उद्देश्य खत्म हो जाएगा। प्रेजिडेंट रूल लगाकर उसे खत्म नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस ने पूछा, क्या संसद आर्टिकल 356 के दौरान स्टेट लिस्ट में कानून नहीं बना सकती? धवन ने कहा, बना सकती है पर लिमिटेशन है।

बिलकिस बानो मामले में SC का गुजरात सरकार से सख्त सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में गोधरा कांड के बाद बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और उसके परिवार के सदस्यों की हत्या के लिए जेल की सजा काट रहे दोषियों के लिए सजा माफी नीति के चयनात्मक आवेदन पर गुजरात सरकार और केंद्र से सवालों की झड़ी लगा दी। न्यायाधीशों ने कहा कि जहां तक ​​समय से पहले छूट देने का सवाल है, गुजरात सरकार मुश्किल स्थिति में है। न्यायमूर्ति बी वी नागरथाना की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में 11 दोषियों को सजा में छूट देने के गुजरात सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कई सवाल उठाए। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पूछा कि दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। ऐसी स्थिति में उन्हें 14 साल की सजा के बाद कैसे रिहा किया जा सकता है? अन्य कैदियों को रिहाई की राहत क्यों नहीं दी गई? इसमें इन दोषियों को चुनिंदा तरीके से नीति का लाभ क्यों दिया गया? 

पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह डबल मर्डर केस में दोषी करार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के राजनेता और लालू यादव की पार्टी राजद के पूर्व विधायक प्रभुनाथ सिंह को 1995 के दोहरे हत्याकांड के मामले में दोषी ठहराया, जबकि 2008 में उन्हें इस मामले में पटना उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया था। 23 अगस्त, 1995 को विधानसभा चुनाव के दौरान सिंह के आदेश के अनुसार मतदान नहीं करने पर दो व्यक्तियों राजेंद्र राय और दरोगा राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। जब पीड़ित के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि गवाहों को डराया और धमकाया जा रहा है, तो मामला छपरा से पटना स्थानांतरित कर दिया गया। दिसंबर 2008 में पटना की एक अदालत ने सबूतों की कमी के कारण प्रभुनाथ सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 2012 में पटना हाई कोर्ट ने प्रभुनाथ सिंह को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने प्रभुनाथ सिंह को 1 सितंबर को अदालत में पेश करने का आदेश दिया, जब सजा की मात्रा पर आदेश सुनाया जाएगा।

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