जब हेमा मालिनी को स्टार ना होने के कारण निर्देशक ने कर दिया था कास्ट करने से इनकार

By रितिका कमठान | Oct 16, 2022

‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी मथुरा की सांसद होने के साथ ही भरतनाट्यम डांसर और कोरियोग्राफर है। आज भी हजारों करोड़ों फैंस के दिलों पर भी राज करती हैं। राजनीति के अलावा फिल्मों में वर्षों से सक्रिय रहने वाली हेमा ने हर फिल्ड में अपनी अलग ही छाप छोड़ी है। फिल्मों में चार दशकों के करियर के दौरान अपना परचम लहराने के बाद राजनीति का रुख करने वाली हेमा मालिनी को कुछ मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था। आइए जानते हैं उनके करियर के कुछ खास पहलुओं के बारे में...

हेमा मालिनी का जन्म तमिलनाडु में 16 अक्तूबर 1948 को हुआ था। उनके पिता वी एस आर चक्रवाती और माता जया लक्ष्मी पेशे से एक फिल्म प्रोड्यूसर थी। हेमा ने शुरुआती पढ़ाई चेन्नई से पूरी की। घर में शुरुआत से ही फिल्मी माहौल मिलने के कारण हेमा का इंटरेस्ट भी फिल्मों की तरफ होने लगा। यही कारण रहा कि उन्होंने सिर्फ 12वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की और आगे अपना भविष्य फिल्मों में बनाने का निश्चय किया। हेमा ने शुरुआत में एक नाटक में डांसर के तौर पर काम किया था। हालांकि करियर की शुरुआत में उन्हें रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा था। एक बार एक तमिल निर्देशक ने उन्हें ये कहकर फिल्म में कास्ट नहीं किया था कि उनमें स्टार वाली कोई बात नहीं है।

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ऐसा था शुरुआती करियर

बॉलीवुड में हेमा मालिनी का संघर्ष काफी लंबा रहा। उन्होंने वर्ष 1968 में राज कपूर के डायरेक्शन में बनी फिल्म सपनों का सौदागर में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर अपना करियर शुरू किया। दुर्भाग्य वश फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहीं कर सकी मगर इसने हेमा मालिनी को बतौर अभिनेत्री साबित कर दिया था। फिल्म में हेमा के रोल को दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

इसके बाद उन्हें करियर की पहली सफलता फिल्म जॉनी मेरा नाम से मिली जो 1970 में रिलीज हुई थी। फिल्म में वो देवानंद के साथ नजर आई थी और इस जोड़ी को दर्शकों ने खूब प्यार दिया था। बॉलीवुड में उनहे वर्ष 1971 में आई फिल्म अंदाज से मिला था, जिसमें वो राजेश खन्ना के साथ नजर आई थी। फिल्म में हेमा मालिनी ने अपने किरदार को जिस खूबसूरती के साथ निभाया था, वो दर्शकों को बहुत पसंद आया था। फिल्म में हेमा द्वारा निभाया गया रोल आज भी उनके फैंस याद करते है।

  

इसके बाद हेमा मालिनी ने वर्ष 1972 में सीता और गीता फिल्म में काम किया और इस फिल्म से उनके करियर को नई उड़ान मिली। सीता और गीता में निभाए गए रोल के लिए आज भी उनकी प्रशंसा होती है। ये फिल्म सिर्फ हेमा मालिनी के लिए ही नहीं बल्कि बॉलीवुड में भी मिल का पत्थर साबित हुई। फिल्म में सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाने के साथ ही उन्हें करियर में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पहला फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिलाया। इस फिल्म में हेमा और धर्मेंद्र साथ दिखाई दिए थे। इसके बाद कई फिल्मों में हेमा की दमदार अदाकारी का प्रदर्शन जारी रहा।

इसके बाद वर्ष 1975 में ऐसी फिल्म आई जिसने बॉलीवुड के इतिहास में सोने से अपना नाम शामिल कराया। वर्ष 1975 में आई फिल्म शोले में धर्मेन्द्र ने वीरु और हेमा मालिनी ने बसंती भूमिका निभाई और दर्शकों के दिलों में हमेशा हमेशा के लिए कैद हो गए। फिल्म में बसंती के किरदार और डायलॉग्स आज भी आईकॉनिक माने जाते है। माना जाता है कि धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की असल जिंदगी में जोड़ी इसी फिल्म की बदौलत बनी थी। इसके बाद 1977 में उनकी फिल्म ड्रीम गर्ल रिलीज हुई, जिसने उन्हें ड्रीम गर्ल की उपाधि दी। ये फिल्म उनके अब तक के करियर की सबसे अलग फिल्म थी।

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शोले के बाद उन्होंने खुशबू, किनारा और मीरा जैसी नॉन ग्लैमरस और लीक से हटकर बनने वाली फिल्मों में भी काम किया। इन फिल्मों संजीदा रोल निभाकर उन्होंने दर्शकों और क्रिटिक्स को बताया कि उनके अभिनय की कोई सीमा नहीं है।

  

जानकारी के मुताबिक हेमा ने अपने फिल्मी करियर में अब तक कई पुरस्कार जीते है। उन्हें वर्ष 2000 में भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा था। उन्हें फिल्म फेयर की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिला था।

शादी को लेकर हुआ था विवाद

हेमा मालिनी ने करियर में आगे बढ़ने के साथ ही निजी जीवन पर भी ध्यान दिया। फिल्म शोले के दौरान धर्मेन्द्र और हेमा की जोड़ी को पसंद किया गया। यही से धर्मेन्द्र हेमा की खूबसूरती के दीवाने हुए थे। धर्मेन्द्र की इच्छा हेमा से शादी करने की थी, मगर हेमा का परिवार इसके विरुद्ध था क्योंकि ये धर्मेंद्र की दूसरी शादी थी।

ऐसा रहा राजनीतिक करियर

हेमा मालिनी ने वर्ष 2004 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा था। उनका राजनीतिक करियर इसी के साथ शुरू हुआ। हेमा ने मुख्यतौर पर समाज सेवा करने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया था। भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा। वो वर्ष 2004 से 2009 तक राज्यसभा में रही। इसके बाद 2014 में हेमा मालिनी ने मथुरा की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और विजय हासिल की। वर्तमान में वो मथुरा से ही लोकसभा सांसद है। हेमा मालिनी राजनीति में आने के बाद से हमेशा ही हर मुद्दे पर प्रखरता से अपनी राय रखती रही है।

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