By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 06, 2026
चंडीगढ़, छह सितंबर हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने इलाज में लापरवाही के मामलों की निगरानी करने वाले जिला बोर्ड के निष्कर्षों से असंतुष्ट लोगों के लिए स्पष्ट, स्वतंत्र और प्रभावी अपीलीय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। आयोग ने कहा कि केवल जिला स्तर पर शिकायतों की जांच के लिए व्यवस्था होना पर्याप्त नहीं है। इसने कहा, ‘‘यदि कोई व्यक्ति चिकित्सा लापरवाही के मामलों की निगरानी करने वाले जिला बोर्ड की राय या निष्कर्ष से असंतुष्ट है, तो उसके पास किसी उच्च या स्वतंत्र प्राधिकरण के समक्ष उसे चुनौती देने के लिए प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध होना चाहिए।’’ ये निर्देश एक शिकायत पर पारित आदेश में दिए गए।
आयोग ने 27 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को उचित नियम और दिशानिर्देश बनाने चाहिए, ताकि बोर्ड के निष्कर्षों को चुनौती दिए जाने की स्थिति में शिकायत के समाधान के लिए एक व्यवस्थित और प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो सके। आयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक की इस आशंका को भी खारिज कर दिया कि राज्य स्तर पर अपीलीय प्राधिकरण के गठन से समानांतर कार्यवाही शुरू हो सकती है। इसने स्पष्ट किया कि इससे समानांतर नहीं, बल्कि फैसले की क्रमिक समीक्षा के चरण बनेंगे।
आयोग ने कहा, ‘‘अपीलीय व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब कोई असंतुष्ट व्यक्ति जिला बोर्ड के निष्कर्षों को चुनौती देने का विकल्प चुनता है।’’ एचएचआरसी के सहायक रजिस्ट्रार पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग की पूर्ण पीठ के आदेश के अनुसार वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।