By अंकित सिंह | Sep 03, 2026
गृह मंत्रालय (MHA) ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) और बर्फ के हिमस्खलन (snow avalanches) के लिए शुरुआती चेतावनी सिस्टम और निगरानी को और मज़बूत करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश जोखिम वाले ग्लेशियल झीलों और हिमस्खलन की आशंका वाले इलाकों की लगातार और सक्रिय निगरानी पर ज़ोर देता है, खासकर तब जब जोखिम ज़्यादा हो।
बैठक में हिमालयी क्षेत्र में GLOF (ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़) के बढ़ते खतरों पर चर्चा हुई। इसमें खास तौर पर अर्ली वार्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम), संवेदनशील झीलों और बर्फ से ढके इलाकों की निगरानी, ज़्यादा जोखिम वाली जगहों और पानी के बहाव के रास्तों की पहचान, समय पर अलर्ट जारी करने, लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी और रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया।
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने ज़ोर देते हुए कहा कि GLOF और बर्फ़ के हिमस्खलन (snow avalanches) के लिए तैयारी सिर्फ़ घटना के बाद की कार्रवाई (रिस्पॉन्स) तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें जोखिम को ध्यान में रखकर योजना बनाना, बचाव के उपाय करना और समुदाय-स्तर पर तैयारी करना भी शामिल होना चाहिए। MHA ने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई कि वे अपनी तैयारियों की योजनाओं की नियमित समीक्षा करें, अर्ली वार्निंग और लोगों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था में कमियों की पहचान करें और किसी भी बड़ी घटना से पहले ज़रूरी सुधारात्मक कदम उठाएं।
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