By एकता | Jan 11, 2026
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने देश में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। ओवैसी ने इच्छा जताई कि वे एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। इस बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत का प्रधानमंत्री 'हमेशा एक हिंदू ही होगा', जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओवैसी ने महाराष्ट्र के सोलापुर में एक चुनावी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संविधान में केवल एक खास धर्म के व्यक्ति को ही पीएम बनने की अनुमति है, लेकिन बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान भारत के हर नागरिक को यह मौका देता है। उन्होंने कहा, 'मेरा सपना है कि एक दिन हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बने।'
ओवैसी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के सीएम ने कहा कि भले ही संविधान किसी को भी पीएम बनने से नहीं रोकता, लेकिन भारत एक हिंदू सभ्यता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का प्रधानमंत्री हमेशा एक हिंदू व्यक्ति ही बनेगा।
रविवार को ओवैसी ने सीएम सरमा के बयान को 'छोटी सोच' वाला बताया और उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है। ओवैसी ने कहा कि संविधान में कहीं नहीं लिखा कि पीएम केवल हिंदू ही हो सकता है।
इस बीच, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी सरमा की आलोचना की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि वे एक सिख थे और 10 साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे। मसूद ने कहा कि संवैधानिक पदों पर कौन बैठेगा, यह धर्म तय नहीं कर सकता।
बीजेपी के अन्य नेताओं ने ओवैसी पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया है। बीजेपी प्रवक्ता प्रकाश रेड्डी ने कहा कि ओवैसी जानबूझकर हिजाब का मुद्दा उठाकर तनाव बढ़ाना चाहते हैं।
बीजेपी नेता आरपी सिंह ने तर्क दिया कि दुनिया भर में कई मुस्लिम महिलाएं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनी हैं, लेकिन उन्होंने हिजाब नहीं पहना। उन्होंने ओवैसी को चुनौती दी कि वे पहले अपनी पार्टी में किसी हिजाब पहनने वाली महिला को बड़े पद पर आगे बढ़ाएं।