By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
भारतीय पैरा तैराक हिमांशु नंदल ने शुक्रवार को यहां एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर पदकों की हैट्रिक पूरी की। यह इन खेलों में उनका तीसरा कांस्य पदक है। ऑप्टिक नर्व (दृष्टि तंत्रिका) में खराबी के कारण जन्म से दृष्टिहीन 22 वर्षीय हिमांशु ने यह स्पर्धा एक मिनट 5.90 सेकंड में पूरी की।
हिमांशु ने मंगलवार को पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धा में पांच मिनट 10.91 सेकंड का समय निकालकर अपने पदकों का खाता खोला था। चार तैराकों के बीच हुए मुकाबले में वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 में कांस्य जीता और शुक्रवार को तीसरा पदक हासिल कर अपनी हैट्रिक पूरी की।
एस11 वर्ग में दृष्टिबाधित खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें वे खिलाड़ी शामिल हैं जिनकी दृष्टि क्षमता बेहद कम है या जिन्हें प्रकाश का बिल्कुल भी आभास नहीं होता। हिमांशु की एशियाई पैरा खेलों तक की यात्रा बचपन से ही खेलों से जुड़ी रही है।
हरियाणा के रोहतक में खेलों के माहौल वाले परिवार में पले-बढ़े हिमांशु के पिता राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं। चार वर्ष की उम्र में वह दिल्ली आ गए और राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संघ से जुड़े और ब्रेल लिपि सीखी। शुरुआत में उन्होंने जूडो में अपनी पहचान बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते।
उन्होंने वर्ष 2021 में तैराकी को अपना नया लक्ष्य बनाया। तैराकी में उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। वर्ष 2024 में हिमांशु पेरिस पैरालंपिक के लिए न्यूनतम योग्यता मानक हासिल करने वाले भारत के पहले दृष्टिहीन तैराक बने।
दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक हिमांशु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार प्रगति की है। वर्ष 2025 में सिंगापुर में आयोजित विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में उन्होंने दो स्पर्धाओं के फाइनल में जगह बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।