Prabhasakshi NewsRoom: Adani, SEBI को घेरने की जल्दबाजी में Hindenburg ने कर दी बड़ी भूल, अब क्या करेंगे भारत विरोधी किट के सारे टूल?

By नीरज कुमार दुबे | Aug 12, 2024

वैश्विक उथलपुथल के बीच तेजी से आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की तरक्की की रफ्तार को पटरी से उतारने के लिए तमाम विदेशी शक्तियां सक्रिय हैं। इन विदेशी शक्तियों को कुछ भारतीयों का भी समर्थन हासिल है। इसकी बदौलत पिछले कुछ वर्षों से लगातार प्रयास हो रहे हैं कि भारतीय उद्योगों और सरकार के बारे में भ्रम फैलाया जाये। इसके लिए एक पूरा सिस्टम बना लिया गया है। विदेश में बैठी कोई कंपनी, उद्योगपति या नेता योजनाबद्ध तरीके से भारत की सरकार या किसी भारतीय कंपनी के बारे में मनगढ़ंत रिपोर्ट जारी करते हैं और देखते ही देखते भारत विरोधी पूरा इको सिस्टम सक्रिय हो जाता है। तुरंत उस रिपोर्ट के आधार पर ट्वीट होने लगते हैं, सोशल मीडिया मंचों पर पोस्ट होने लगते हैं, यूट्यूब वीडियो बनने लगते हैं और तमाम विशेषज्ञ उस पर चर्चा करने लगते हैं और सरकार को घेरने लगते हैं। मोदी और भारत विरोधी इस इको सिस्टम की जो ताजा रिपोर्ट सामने आई है वह नई बोतल में पुरानी शराब जैसी लगती है। हम आपको बता दें कि अमेरिकी शोध एवं निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक बार फिर से अडाणी समूह पर निशाना साधा है साथ ही इस बार सेबी की प्रमुख को भी लपेटे में ले लिया है।

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आज जो लोग हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर हो हल्ला मचा रहे हैं उन्हें इस बात की जानकारी भी होनी चाहिए कि इस विदेशी कंपनी ने यह कदम तब उठाया जब सेबी ने उसके खिलाफ कार्रवाई की शुरुआत की।  सेबी ने इस साल 26 जून को हिंडनबर्ग को एक कारण बताओ नोटिस भेजकर "जानबूझकर सनसनी फैलाने और कुछ तथ्यों को विकृत करने" के साथ अपना दांव लगाने के लिए न्यूयॉर्क हेज फंड के साथ काम करने का आरोप लगाया था। इस तरह से देखा जाये तो जिस हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है, उसी ने पलटवार करते हुए सेबी और इसकी प्रमुख को घेरने का नाकाम प्रयास किया है।

अडाणी समूह की सफाई

जहां तक हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट में लगाये गये आरोपों पर अडाणी समूह और सेबी के स्पष्टीकरण की बात है तो आपको बता दें कि अडाणी समूह ने शेयर बाजार को दी एक सूचना में कहा, "हिंडनबर्ग के नए आरोप सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं का दुर्भावनापूर्ण, शरारती और छेड़छाड़ करने वाला चयन है। ऐसा तथ्यों और कानून की अवहेलना करते हुए निजी मुनाफाखोरी के लिए पूर्व-निर्धारित निष्कर्षों पर पहुंचने के इरादे से किया गया है।" समूह ने कहा, "हम अडाणी समूह के खिलाफ इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ये उन अस्वीकार किए जा चुके दावों का दोहराव हैं जिनकी गहन जांच की गई है, जो निराधार साबित हुए हैं और जनवरी, 2024 में उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज कर दिए गए हैं।" अडाणी समूह ने कहा, "हमारी प्रतिष्ठा को बदनाम करने के लिए जानबूझकर किए गए इस प्रयास में उल्लिखित व्यक्तियों या मामलों के साथ हमारा कोई वाणिज्यिकि संबंध नहीं है। हम पारदर्शिता और सभी कानूनी एवं नियामकीय प्रावधानों के अनुपालन के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं।"

सेबी का स्पष्टीकरण

इस बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक बयान में कहा है कि उसकी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच ने समय-समय पर संबंधित जानकारी दी और संभावित हितों के टकराव से जुड़े मामलों से खुद को अलग रखा। नियामक ने कहा कि उसने अडाणी के खिलाफ हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों की विधिवत जांच की है। उसकी 26 पहलुओं में से सिर्फ एक पहलू की जांच बची है और वह भी पूरी होने वाली है। 

सेबी ने कहा कि माधवी पुरी बुच ने समय-समय पर ‘संबंधित खुलासे’ किए हैं और संभावित हितों के टकराव से जुड़े मामलों से खुद को अलग भी रखा है।

हिंडनबर्ग के आरोप

हिंडनबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की प्रमुख माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच के पास उस विदेशी कोष में हिस्सेदारी है, जिसका इस्तेमाल अडाणी समूह में धन की कथित हेराफेरी के लिए किया गया था। हिंडनबर्ग के मुताबिक, माधवी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने बरमूडा और मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। हिंडनबर्ग ने कहा कि ये वही कोष हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदाणी ने पैसों की हेराफेरी करने और समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। हम आपको बता दें कि विनोद अडाणी, अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी के बड़े भाई हैं।

हिंडनबर्ग ने शनिवार रात को एक ब्लॉगपोस्ट में कहा था कि माधवी और उनके पति ने ऑफशोर इकाइयों में निवेश किया जो कथित तौर पर इंडिया इन्फोलाइन (आईआईएफएल) द्वारा प्रबंधित फंड का हिस्सा थे और उसमें विनोद अडाणी ने भी निवेश किया था। हिंडनबर्ग के मुताबिक, कथित तौर पर ये निवेश 2015 में किए गए थे। वर्ष 2017 में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में माधवी पुरी बुच की नियुक्ति और मार्च 2022 में इसका चेयरपर्सन बनने से काफी पहले ये निवेश किए गए थे।

इसके मुताबिक, बरमूडा स्थित ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड भी इस फंड में निवेश करने वालों में शामिल था। अडाणी समूह से जुड़ी इकाइयों द्वारा समूह की कंपनियों के शेयरों में कारोबार के लिए कथित तौर पर ग्लोबल ऑपर्च्युनिटीज फंड का ही इस्तेमाल किया गया था। निवेश कंपनी ने ‘व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों’ का हवाला देते हुए कहा, “सेबी की वर्तमान प्रमुख माधवी पुरी बुच और उनके पति के पास अडाणी समूह में धन के हेराफेरी घोटाले में इस्तेमाल किए गए दोनों अस्पष्ट ‘ऑफशोर फंड’ में हिस्सेदारी थी।” हम आपको बता दें कि विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले फंड को ऑफशोर फंड या विदेशी कोष कहते हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विनोद अदाणी अस्पष्ट विदेशी कोष बरमूडा और मॉरीशस कोषों को नियंत्रित करते थे। हिंडनबर्ग का आरोप है कि इन कोषों का इस्तेमाल धन की हेराफेरी करने और समूह के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए किया गया था।

हम आपको यह भी याद दिला दें कि हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 में जारी अपनी पिछली रिपोर्ट में अडाणी समूह पर वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी और शेयरों की कीमतें चढ़ाने के लिए विदेश कोष के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। हालांकि अडाणी समूह ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह नियामकीय प्रावधानों का पालन करता है।

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